सिवनी जिले के बरघाट विकासखंड में स्थित आष्टा का काली माता मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर बरघाट तहसील से धरमकुंआ मार्ग पर स्थित इस मंदिर को लेकर दो मान्यताएं प्रचलित हैं।
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एक मान्यता के अनुसार इस मंदिर का निर्माण देवताओं ने एक ही रात में किया था। जितना निर्माण रात में हो सका, उतना ही मंदिर बना और शेष अधूरा छोड़ दिया गया। दूसरी मान्यता के अनुसार 13वीं सदी में देवगिरी के यदुवंशी राजा रामचंद्र और उनके मंत्री हिमाद्री ने विदर्भ क्षेत्र में 100 से अधिक मंदिरों का निर्माण करवाया था। इनमें से 8 मंदिर इसी गांव में बनवाए गए, जिसके कारण गांव का नाम आष्टा पड़ा।
मंदिर के आस-पास बिखरे पत्थरों की मरम्मत और जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है।
मंदिर का निर्माण पत्थरों से किया गया है। मंदिर परिसर में दो मंदिर और एक मंडप है। मंदिर के गर्भगृह में मूर्ति नहीं है। लेकिन पिछली दीवार से सटी हुई उत्तर मुखी मां काली की पाषाण मूर्ति स्थापित है। मंदिर में पत्थरों की जुड़ाई लोहे और शीशे की छड़ों से की गई है। पत्थरों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर लोहे के शिकंजे से कसा गया है, जिससे उनका भार संतुलित रहता है।
नवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। भक्त माता के दरबार में दीप प्रज्ज्वलित कर कलश की स्थापना करते हैं। नौ दिनों तक मंदिर में अखंड ज्योति जलती रहती है। वर्तमान में मंदिर के आस-पास बिखरे पत्थरों की मरम्मत और जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है।

उत्तर मुखी में मां काली की पाषाण मूर्ति स्थापित है।