अश्विन को सिडनी थंडर्स (Sydney Thunder) नाम की टीम ने खरीदा है. उन्हें जितनी रकम मिल रही है, वह BBL के इतिहास की सबसे बड़ी विदेशी डील में से एक मानी जा रही है.
सैलरी में इतना अंतर क्यों है?
अश्विन को मिलने वाली कुल रकम, BBL की आमतौर पर सबसे ऊंची सैलरी (2.45 करोड़ रुपये) से कहीं ज्यादा है. ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्हें जो 8.88 करोड़ रुपये मिल रहे हैं, वह सिर्फ खेलने की फीस नहीं है. इसमें सिडनी थंडर्स क्लब और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए मार्केटिंग समझौते (यानी उनके नाम का इस्तेमाल प्रचार के लिए करने का पैसा) का पैसा भी शामिल है. इसी वजह से अश्विन लीग के सबसे महंगे खिलाड़ियों में से एक बन गए हैं.
BCCI क्यों नहीं चाहता भारतीय खिलाड़ी विदेशी लीग में खेलें?
BCCI का एक बहुत सख्त नियम है. इसके तहत कोई भी भारतीय क्रिकेटर, जो अभी इंटरनेशनल या घरेलू क्रिकेट खेल रहा है, वह ऑस्ट्रेलिया की BBL, कैरेबियन की CPL या इंग्लैंड की The Hundred जैसी विदेशी T20 लीग में नहीं खेल सकता. इसके पीछे बोर्ड के कुछ बड़े कारण हैं:
(A) IPL को नंबर-1 बनाए रखना
यह सबसे बड़ी वजह है. BCCI चाहता है कि उसकी अपनी इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) दुनिया की सबसे खास और सफल T20 लीग बनी रहे.
खास पहचान: BCCI मानता है कि अगर रोहित शर्मा या जसप्रीत बुमराह जैसे हमारे बड़े खिलाड़ी दुनिया भर की लीग में खेलने लगेंगे, तो IPL की अपनी खास पहचान खत्म हो जाएगी.
प्रचार पर असर: अगर हमारे सितारे दूसरे देशों की लीग में दिखेंगे, तो IPL देखने वाले लोगों की संख्या और इसे मिलने वाले विज्ञापनों (स्पॉन्सरशिप) पर बुरा असर पड़ सकता है.
(B) अपने देश के क्रिकेट को बचाना
BCCI अपने घरेलू क्रिकेट को बहुत महत्व देता है, खासकर रणजी ट्रॉफी को, जिसे वह देश की क्रिकेट प्रणाली की रीढ़ मानता है.
रणजी की अहमियत: कई विदेशी लीग ठीक उस समय होती हैं, जब भारत में घरेलू क्रिकेट सीजन चल रहा होता है. अगर खिलाड़ियों को बाहर खेलने दिया गया, तो वे रणजी ट्रॉफी जैसे जरूरी घरेलू टूर्नामेंट को छोड़ देंगे. राहुल द्रविड़ जैसे पूर्व कोच भी कह चुके हैं कि इससे हमारा घरेलू क्रिकेट ‘खत्म’ हो जाएगा और भारतीय क्रिकेट कहीं वेस्टइंडीज जैसी हालत में न पहुंच जाए.
टेस्ट क्रिकेट की ढाल: BCCI का मानना है कि एक मजबूत रणजी ट्रॉफी ही टेस्ट क्रिकेट के लिए अच्छे खिलाड़ी तैयार करती है.
(C) खिलाड़ियों का आराम और देश के लिए खेलना
भारतीय टीम का इंटरनेशनल मैच कैलेंडर बहुत व्यस्त रहता है.
चोट से बचाव: विदेशी लीग में खेलने से खिलाड़ियों पर काफी बोझ और बढ़ेगा और उन्हें चोट लगने का खतरा बढ़ जाएगा. BCCI चाहता है कि उसके खिलाड़ी पूरे साल फिट रहें और देश की टीम के लिए हर बड़े टूर्नामेंट में उपलब्ध रहें.
BCCI का नियम अश्विन पर लागू क्यों नहीं?
BCCI का यह नियम सिर्फ उन भारतीय खिलाड़ियों पर लागू होता है, जो अभी क्रिकेट खेल रहे हैं. जो खिलाड़ी इंटरनेशनल क्रिकेट और IPL समेत भारत के सभी तरह के क्रिकेट से संन्यास ले लेते हैं, उन्हें बोर्ड से ‘नो ऑबजेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) मिल जाती है. इसके बाद विदेशी लीग में खेलने की इजाजत मिल जाती है. रविचंद्रन अश्विन के साथ भी यही हुआ है, उन्होंने IPL से संन्यास लेने के बाद ही BBL में खेलने का फैसला किया है.
BCCI ने ये नियम कब बनाया
BCCI ने नियम 2008 में आईपीएल शुरू होने से बनाया. 2010 में जब बीबीएल बन रहा था, तो क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने बीसीसीआई से भारतीय खिलाड़ियों को भेजने की मांग की, लेकिन बीसीसीआई ने मना कर दिया. कारण यह था कि आईपीएल को दुनिया की नंबर एक लीग बनाना था, जहां सभी विदेशी सितारे आते हैं. आज आईपीएल की वैल्यू 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है, और यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी बन गया है.
महिला क्रिकेटरों के नियम अलग: भारतीय महिला क्रिकेटरों को विदेशी लीगों जैसे डब्ल्यूबीबीएल या द हंड्रेड में खेलने की अनुमति है, क्योंकि महिला क्रिकेट अभी विकासशील है और दूसरी लीग में खेलने से भारतीय महिला क्रिकेटर्स को अनुभव मिलता है.
क्यों बेहतर है BCCI का ये नियम
यह नीति भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए अच्छी है, क्योंकि इससे राष्ट्रीय टीम मजबूत रहती है और विश्व कप जैसे टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन होता है. लेकिन कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे खिलाड़ी नए अनुभव से वंचित रह जाते हैं.