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Dharohar: लवणासुर अपने मामा रावण की ही तरह राक्षसी उपासना में पशुओं और मनुष्यों की बलि दिया करता था. वैदिक यज्ञ करने वाले ऋषियों के लिए तो लवणासुर काल था. त्रस्त देवताओं की प्रार्थना पर भगवान राम ने अपने छोटे भाई शत्रुघ्न को लवणासुर का वध करने का आदेश दिया था.
छतरपुर. मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के लवकुश नगर में एक ऐसा पहाड़ भी है, जिसका संबंध त्रेतायुग से बताया जाता है. किंवदंती है कि इस पहाड़ पर लवणासुर नाम का राक्षस रहता था, जो भगवान शंकर का भक्त था. इसी पहाड़ के सामने एक बड़ा सा पहाड़ भी है, जहां ऋषि-मुनि तपस्या किया करते थे लेकिन लवणासुर राक्षस आए दिन उन्हें परेशान करता था. एक दिन ऋषि च्यवन (ऋषि भृगु के वंशज) के नेतृत्व में सभी ऋषियों ने भगवान राम को लवणासुर राक्षस के बारे में बताया. इसके बाद भगवान राम ने अपने सबसे छोटे भाई शत्रुघ्न को लवणासुर का वध करने भेजा.
वह बताते हैं कि लवणासुर राक्षस का जिक्र वाल्मीकि रामायण में भी आता है. यह वही राक्षस है, जिसका वध शत्रुघ्न ने किया था क्योंकि वह ऋषि-मुनियों को परेशान करता था, तो शत्रुघ्न जी को यहां बुलाया गया था. यह क्षेत्र चित्रकूट से लगभग 150 किलोमीटर की दूरी पर है और यहां उस समय घनघोर जंगल और पहाड़ थे. यहां ऋषि-मुनि तपस्या करते थे और यहीं पर वाल्मीकि आश्रम के क्षेत्र का जिक्र भी आता है.
बंबरबेनी समिति के सदस्य मातादीन विश्वकर्मा लोकल 18 को बताते हैं कि जब बंटवारा हुआ था, तो शत्रुघ्न को मथुरा राज्य दिया गया था और लवणासुर का क्षेत्र भी मथुरा के अंतर्गत आता था. उस समय लवणासुर अपनी राक्षसी उपासना के लिए पशुओं और ऋषि-मुनियों की बलि देता था. जब यह जानकारी लक्ष्मण जी को मिली, तो वह लवणासुर का वध करने के लिए यहां आए थे.
रावण खानदान से था लवणासुर का संबंध
बता दें कि वाल्मीकि रामायण के उत्तरकांड में लवणासुर की कथा वर्णित है. लवणासुर के पिता का नाम मधु था जबकि उसकी माता राक्षसी वंश की कुम्भिनी थी. कुम्भिनी का खास रिश्ता लंकापति रावण से था. दरअसल वह रावण की सौतेली बहन थी.
महादेव का भक्त था लवणासुर
लवणासुर स्वभाव से रावण से कहीं ज्यादा उग्र और अहंकारी था. वह मथुरा से लगभग साढ़े तीन मील दक्षिण-पश्चिम की ओर स्थित मधुपुरी का राजा था, जिसे मधुवन ग्राम भी कहते हैं. लवणासुर अपने मामा रावण की तरह महादेव का भक्त था और उसने तप कर अमोघ त्रिशूल हासिल किया था.
राक्षसी उपासना में देता था नरबलि
वह अपने मामा की ही तरह राक्षसी उपासना में पशुओं और मनुष्यों की बलि दिया करता था. वैदिक यज्ञ करने वाले ऋषियों के लिए तो वह काल था. त्रस्त देवताओं की प्रार्थना पर श्रीराम ने अपने छोटे भाई शत्रुघ्न को लवणासुर का वध करने का आदेश दिया था. शत्रुघ्न युद्ध के लिए जाते समय महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में भी रुके थे.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.