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Dhan Ki Kheti: धान की फसल इस समय बाली आने के चरण में है और अच्छी बारिश से किसान उत्साहित हैं, लेकिन मौसम खुलते ही धूप और बढ़ी नमी ने भूरा माहू जैसे कीटों का खतरा बढ़ा दिया है. जानें बचाव…
Satna News: धान की फसल इस समय अपने नाजुक दौर से गुजर रही है. कहीं बालियां निकल रही हैं तो कहीं खेतों में सुनहरी बालियों की भरमार नजर आ रही है. इस बार अच्छी बारिश ने किसानों की उम्मीदों को पंख लगाए हैं, लेकिन अब मौसम खुलते ही धूप निकलने से धान की फसलों पर कीटों का हमला शुरू हो गया है. सबसे खतरनाक कीटों में से एक है भूरा माहू, जिसे ब्राउन प्लांट हूपर के नाम से भी जाना जाता है. वहीं बघेलखंड में इसे भूरा फुदका कहते हैं. ये शुरुआती चरण में पकड़ में आने पर आसानी से काबू में आ सकता है, लेकिन अगर इसे नजरअंदाज कर दिया तो यह पूरी फसल को बर्बाद कर देता है.
लोकल 18 से बातचीत में कृषि विशेषज्ञ अमित सिंह बताते हैं कि भूरा माहू एक प्रकार का छोटा कीट होता है जो धान के पौधे के निचले हिस्से, यानी जहां से कल्ले निकलते हैं वहां जम जाता है. यह पौधे का रस चूसता है और धीरे-धीरे पौधे को सुखा देता है. सबसे बड़ी समस्या तब होती है जब पौधा दाने बनने से पहले ही सूख जाता है जिससे पूरी उपज प्रभावित होती है. भारत में इसका असर खासकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में देखा गया है. यहां धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है इसलिए इन क्षेत्रों में भूरा माहू का प्रकोप तेजी से फैलता है.
कितना नुकसान कर सकता है यह कीट?
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार अगर इस कीट को समय पर नियंत्रित न किया जाए तो यह 80 से 90 प्रतिशत तक फसल को नुकसान पहुंचा सकता है. एक बार अगर यह खेत में फैल गया तो महज एक हफ्ते में पूरे खेत को सुखा सकता है. खेत में यह पैचेस के रूप में नजर आता है, यानी कुछ हिस्से की फसल अचानक सूख जाती है.
मौसम क्यों है अनुकूल?
सतना सहित आसपास के क्षेत्रों में इस समय मौसम पूरी तरह भूरा माहू के लिए अनुकूल बना है. तेज धूप निकल रही है, तापमान बढ़ा है और आर्द्रता 60 से 80 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है. यह सारे कारक मिलकर भूरा माहू के तेजी से फैलाव में मददगार साबित होते हैं. यही वजह है कि कृषि वैज्ञानिक इस समय किसानों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं.
कैसे करें भूरा माहू से बचाव?
अमित लोकल 18 से बताते हैं कि फसल को इस कीट से बचाने के लिए कुछ सावधानियां और उपाय बेहद जरूरी हैं. धान की रोपाई के समय हर 10 से 15 कतारों के बाद एक फीट की जगह जरूर छोड़ें. इससे हवा का संचार होगा और कीट का प्रकोप कम फैलेगा. इसके अलावा खेत को वेट एंड ड्राई सिस्टम में रखें, मतलब पानी भरें, फिर निकालें और 3-4 दिन बाद दोबारा पानी भरें. नाइट्रोजन और यूरिया का छिड़काव नियंत्रित तरीके से करें क्योंकि अत्यधिक छिड़काव कीटों को और आकर्षित करता है.
कौन से कीटनाशक असरदार?
अमित का कहना है कि किसान अक्सर भूरा माहू की शिकायत लेकर आते हैं. इसके नियंत्रण के लिए डोमिनेंटी और क्लोरपाइरीफोस का मिश्रण बेहद असरदार है. इसके अलावा चेस कीटनाशक का छिड़काव भी कारगर साबित होता है. किसान 15 लीटर पानी में 13–14 ग्राम डोमिनेंटी और 30–35 एमएल क्लोरपाइरीफोस मिलाकर घोल तैयार करें. यह घोल लगभग 15 डिसमिल खेत में छिड़काव के लिए पर्याप्त है. इसका असर महज दो दिनों में दिखने लगता है और भूरा माहू पूरी तरह खत्म हो जाता है. इस तरह सही समय पर किया गया छिड़काव किसानों की मेहनत और फसल दोनों को बचा सकता है.
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें