पंजाबी संगीत के लिविंग लीजेंड गुरदास मान ने शनिवार रात रविन्द्र भवन के हंसध्वनि सभागार में अपने गीतों से ऐसा रंग जमाया कि दर्शक देर तक झूमते रहे। मंच पर तबला, ढोलक, गिटार और की-बोर्ड पर सजे सभी आर्टिस्ट थ्री पीस सूट में थे, मगर गुरदास मान अपने आइकॉनि
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कंसर्ट की शुरुआत उन्होंने पंजाबी में गणपति, ब्रह्मा, विष्णु, महेश और मां पार्वती को याद कर की। फिर हिंदी प्रदेश की सराहना में सागर निजामी की गजल ‘कुछ लोग जमाने में ऐसे भी तो होते हैं’ गाकर माहौल भावुक कर दिया। बच्चों के बीच उतरकर उन्होंने मासूमियत पर लाइन पढ़ी ‘निक्कर ना पजामा ना कोई पतलून, ये नहीं-नहीं दुनिया में है कितना सुकून’।
रविंद्र भवन में हुई परफॉर्मेंस
इसके बाद उन्होंने अपने हिट गानों की झड़ी लगाई। ‘वे सजना में जुदाई’ का दर्द सुनाया तो ‘मामला गड़बड़ है’ पर पूरा हॉल थिरक उठा। अंत में “ये देश है वीर जवानों का…” गाकर देशभक्ति का जोश भर दिया। मान की आवाज और अंदाज ने भोपाल को एक यादगार संगीत संध्या दी।