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Agriculture News: गेहूं की इन किस्मों की खासियत सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं है बल्कि गुणवत्ता के मामले में भी ये किस्में काफी बेहतर हैं. इनसे बने आटे की रोटियां नरम और स्वादिष्ट होती हैं. इस वजह से बाजार में इनकी कीमत भी अच्छी मिल जाती है.
खरगोन. मध्य प्रदेश का खरगोन जिला गेहूं उत्पादन के लिए जाना जाता है. यहां रबी सीजन की शुरुआत अक्टूबर में होती है और किसान अलग-अलग समय पर अपने खेतों में फसल बोते हैं. कई किसान भाई 15 अक्टूबर से ही अर्ली किस्मों की बुआई शुरू कर देते हैं, ताकि बरसात की बची नमी का लाभ लिया जा सके. वहीं कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि जिनके पास पर्याप्त सिंचाई की सुविधा है, वे 15 से 30 नवंबर के बीच बुआई कर ज्यादा उत्पादन ले सकते हैं लेकिन इसके लिए सही किस्मों का चयन जरूरी है.
खरगोन के कृषि वैज्ञानिक डॉ राजीव सिंह लोकल 18 को बताते हैं कि 15 से 30 नवंबर के बीच की बुआई के लिए गेहूं की पांच वैरायटी खास मानी जाती हैं. इनमें एचआई 1544, जी डब्ल्यू 322, जी डब्ल्यू 366, एचआई 1636 और एचआई 1658 शामिल हैं. ये किस्में चपाती बनाने के लिए उत्तम मानी जाती हैं और बाजार में इनकी सबसे ज्यादा मांग रहती है. किसान भाई अगर इन वैरायटी की निर्धारित समय पर बुआई करें, तो खेत की बालियां दानों से लबालब भर सकती हैं.
20 कुंतल तक होगा उत्पादन
बता दें कि इन किस्मों की खासियत सिर्फ उत्पादन तक ही सीमित नहीं है बल्कि गुणवत्ता के मामले में भी ये बेहतर हैं. इनसे बने आटे की रोटी नरम और स्वादिष्ट होती है, जिसकी वजह से बाजार में इनकी कीमत भी अच्छी मिलती है. विशेषज्ञों के अनुसार, जिन किसानों के पास 5 से 6 बार सिंचाई की सुविधा है, वे इन वैरायटी से प्रति एकड़ 18 से 20 कुंतल तक का उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.