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Cultivate Colored Cauliflower: रंगीन गोभी की फसल को तैयार होने में करीब तीन से चार महीने का समय लगता है. सफेद गोभी के मुकाबले ये रंगीन गोभी की कीमत दोगुना होती है. इसकी खेती करने से किसानों को काफी फायदा मिलता है, आइए जान लें पूरी जानकारी.
हम जितने एडवांस होते जा रहे है, उससे कई ज्यादा भारतीय खेती एडवांस हो रही है. नई तकनीक आ रही है, जिससे किसान भाई अपना भी रहे हैं. खेती में नए-नए प्रयोग हो रहे हैं. ऐसे में हम आपको एक ऐसी खेती के बारे में बता रहे हैं, जिससे आप अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं. इसमें हम आपको रंगीन गोभी के बारे में बता रहे हैं, जो खेती करने के मजे को दोगुना कर देगी.

अब भारतीय किसान कई तरह के रंगों की गोभी की खेती कर रहे हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि उनकी मार्केट डिमांड भी ज्यादा है और इनकी कीमत भी ज्यादा है. ऐसे में किसान भाई रंगीन गोभी की खेती कर रहे हैं.

आपने अब तक सिर्फ सफेद गोभी देखी होगी, लेकिन रंगीन गोभी में हरी, नीली, पीली और नारंगी गोभी की खेती कर सकते हैं. दरअसल, कृषि वैज्ञानिकों ने रंगीन गोभी की नई किस्में तैयार की है. पीले रंग की गोभी को कैरेटिना, गुलाबी गोभी को एलिनटीला, हरे रंग की गोभी को ब्रोकली कहते हैं.

इसकी खेती की तैयारी अक्टूबर में की जाती है. इसके लिए एक नर्सरी तैयार करनी होती है. इसका रोपा 20 से 30 दिन में तैयार हो जाता है. रंगीन गोभी के पहले मिट्टी की जांच करना जरूरी है. वहीं, जलवायु का ध्यान रखना भी जरूरी है. तापमान 20 से 25 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए. वहीं, मिट्टी का पीएच मान 5.5 से 6.5 होना चाहिए.

रंगीन गोभी की फसल को तैयार होने में करीब तीन से चार महीने का समय लगता है. सफेद गोभी के मुकाबले ये रंगीन गोभी की कीमत दोगुना होती है. इसमें लागत सफेद गोभी की खेती जितनी ही लगती है.

एक्सपर्ट के मुताबिक, खाने की थाली में जितना रंगों का खाना होगा, वह हमारे लिए उतना ही फायदेमंद होगा. ऐसे में रंगीन गोभी से हमारे शरीर को भी बेहद फायदा मिलता है.

इसमें कई तरह के विटामिन और मिनरल्स होते हैं, जो हमारी इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं. इसके खाने से मोटापा, दिल की बीमारियों से मुक्ति और कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव करता है.