कलेक्टर कार्यालय के बाहर नारेबाजी करते आदिवासीजन।
सिंगरौली जिले के चितरंगी इलाके के नौगई-2 गांव के लगभग 40 आदिवासी परिवार बेघर होने की कगार पर हैं। इन परिवारों ने सोमवार को सिंगरौली कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मांग की है कि उन्हें विस्थापित न किया जाए।
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ये परिवार पिछले 100 सालों से सरकारी जमीन पर बसे हुए हैं। हाल ही में, राजस्व विभाग ने यह जमीन वन विभाग को हस्तांतरित कर दी है। वन विभाग अब इस जमीन पर पौधारोपण कर रहा है, जिसके कारण इन परिवारों के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है।
कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन लेकर पहुंचे आदिवासी।
इन सभी परिवारों का संबंध आदिवासी समाज से है। एक परिवार की मुखिया शकुंतला देवी ने बताया कि उनकी चार पीढ़ियां इसी जगह पर रह रही हैं और वे यहीं अपने बच्चों का भरण-पोषण कर रही हैं। उन्होंने सरकार से अपील की है कि उन्हें जैसे हैं, वैसे ही रहने दिया जाए।
ग्राम पंचायत के निवासी राकेश ने बताया कि वे सरकार से विकास नहीं मांग रहे हैं, बल्कि केवल यह चाहते हैं कि उन्हें उनकी वर्तमान स्थिति में रहने दिया जाए। उन्होंने जोर दिया कि यह केवल 40 परिवारों का मामला नहीं है, बल्कि इन परिवारों में लगभग 300 लोग शामिल हैं, जिन्हें रहने के लिए जमीन की आवश्यकता है।
डिप्टी कलेक्टर बोले- करेंगे जांच
इस मामले पर डिप्टी कलेक्टर सृजन वर्मा ने बताया है कि आदिवासियों की ओर से ज्ञापन दिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच करवाई जा रही है और किसी के साथ कोई अन्याय नहीं होगा।