Last Updated:
Baba Mahakal Shahi Sawari: विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की सवारी सोमवार को पुराने शहर से नए शहर आयगी. सवारी में बाबा महाकाल को देख भक्त निहाल हो जायगे. जानिए इस बार यह सवारी कब और कितनी बजे नए शहर आएगी.
विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की नगरी के आरद्धाय के रूप मे स्वयं बाबा महाकाल पूजे जाते हैं. सालभर मे कई ऐसे महत्वपूर्ण दिन आते हैं जिसमें जगत के रचियता भगवान महाकाल अपना मंदिर परिसर छोड़ भक्तों के दुख-दर्द दूर करने शाही ठाठ-बाट के साथ प्रजा का हाल जानने निकलते है.

ऐसा ही एक सुनहरा पल विजया दशमी पर देखने को मिलता है. जिसमें सालभर में एक बार बाबा महाकाल पुराने शहर से निकलकर नए शहर में अपने भक्तो को दर्शन देने पहुंचते हैं. इस दौरान भक्तो की खुशी का ठिकाना नहीं रहता है. क्योंकि उनके आरद्धाय भगवान महाकाल उनके हाल चाल जानने खुद निकलते हैं.

प्रतिवर्ष विजय दशमी पर वे एक राजा के रूप में शमी वृक्ष का पूजन करने दशहरा मैदान जाते हैं. साल में यह एक मात्र अवसर होता है जब अवंतिकानाथ नए शहर फ्रीगंज पधारते हैं. इस बार भी यह सुंदर नज़ारा देखने को मिलेगा.

भगवान महाकाल 2 अक्टूबर को राजसी वैभव के साथ नगर भर्मण पर निकलेंगे. महाकाल मंदिर के पुजारी महेश के जी अनुसार दशहरा को विजय उत्सव के रूप मे मनाया जाता है. इस दिन राजा महाराजा सर्वत्र विजय की कामना से शमी वृक्ष का पूजन कर नगर सीमा का उल्लंघन करते हैं.

ऐसे तो बाबा महाकाल सावन-भादो में भक्तो को दर्शन देने निकलते है. लेकिन दशहरे पर भी यह सिलसिला देखने को मिलता है. यह परंपरा कोई नई नहीं है यह आदि अनादिकाल से चली आ रही है. भगवान महाकाल उज्जैन के राजा हैं, इसलिए वे भी लोकमंगल की कामना से शमी वृक्ष का पूजन करने दशहरा मैदान जाते हैं.

बाबा महाकाल जब भी मंदिर परिसर से निकलते हैं उसके पहले सभामंडप में बाबा महाकाल का विधि-विधान से पूजा पाठ किया जाता है. उसके बाद भगवान की आरती कर राजसी ठाठ से अपने मंदिर परिसर से निकलते है. इस बार भी यह सिलसिला 2 अटूबर को देखने को मिलेगा.

बाबा महाकाल हर साल की तरह इस बार भी शाम चार बजे ठाठ बाट के साथ सवारी में विराजमान होकर निकलेंगे.भगवान पुराने शहर से होते हुए फ्रीगंज ओवरब्रिज के रास्ते नए शहर फ्रीगंज में प्रवेश करते हैं तथा दशहरा मैदान पहुंचेगे. इस दौरान प्रसाशनिक अधिकारी कलेक्टर रौशन कुमार सिंह तथा एसपी प्रदीप शर्मा भगवान महाकाल व शमी वृक्ष की पूजा अर्चना करेंगे.

हर साल की तरह इस साल भी विजय दशमी पर महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर नया ध्वज लगेगा. यह ध्वज चढ़ाने की परंपरा भी काफ़ी पुरानी है. दशहरे के दिन भगवान की आरती के बाद शिखर पर नया ध्वज चढ़ाया जाएगा. महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनितगिरिजी महाराज ध्वज की पूजा की जाएगी.