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300 करोड़ की लागत से बांध बनने पर सागर, मकरोनिया, कैंट और आर्मी क्षेत्र में उत्पन्न होने वाले जल संकट से राहत रहेगी. साथ ही सुरखी विधानसभा के 29 गांव की 5000 हैकटेयर जमीन भी सिंचित होगी.
Sagar News: सागर में 300 करोड़ की बेबस नदी सिंचाई परियोजना को स्वीकृति मिली है. इस बांध का पानी 2028 से सागर की जीवनदायिनी राजघाट बांध परियोजना को भी मिलेगा. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस परियोजना को बनाने का ऐलान किया है, जिससे गर्मी में सागर, मकरोनिया, कैंट और आर्मी क्षेत्र में होने वाले जल संकट से राहत रहेगी. साथ ही सुरखी विधानसभा के 29 गांव की 5000 हेक्टेयर जमीन भी सिंचित होगी. जल्द ही डीपीआर फाइनल होगी और फिर भू अर्जन का काम शुरू किया जाएगा. इस परियोजना पर बीते 2 साल से सर्वे किया जा रहा है.
बता दें, साल 2001 में सागर की प्यास बुझाने के लिए राजघाट बांध परियोजना शुरू की गई थी. लेकिन, बढ़ती आबादी की वजह से पर्याप्त जल आपूर्ति नहीं हो पा रही थी. इसके चलती लंबे समय से राजघाट बांध की ऊंचाई बढ़ाने की मांग की जा रही थी. ऊंचाई बढ़ने से गांव और खेती की भूमि डूब में आ जाती, जिसकी वजह से प्रस्ताव अटका हुआ था. लेकिन, अब कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की मांग पर आखिरकार मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सागरवासियों की सुविधा को देखते हुए परियोजना का ऐलान कर दिया.
ऐसे मिलेगा बांध से पानी
बेबस नदी परियोजना के तहत बांध खमरिया गांव के पास बनाया जाना है, जो राजघाट बांध से ही करीब 16 किलोमीटर ऊपर होगा. ऐसे में बांध से नदी में पानी छोड़ने पर यह सीधे राजघाट बांध में ही आएगा. बांध की क्षमता 36.64 एमसीएम यानी 36.6 अरब लीटर पानी की होगी. गर्मी के समय जब राजघाट बांध रीतने लगता है, उस समय 11.25 एमसीएम यानी 11.28 अरब लीटर पानी बांध में छोड़ा जाएगा, जो 25 एमसीएम से अधिक पानी बचेगा, वह 29 गांवों में सिंचाई के लिए दिया जाएगा.
रोज 9 करोड़ लीटर की सप्लाई
राजघाट बांध परियोजना से रोजाना 9 करोड़ लीटर पानी की सप्लाई सागर, मकरोनिया और कैंट क्षेत्र में की जाती है. ऐसे में जो 11.28 अरब लीटर पानी बेबस नदी परियोजना से यहां भेजा जाएगा, उससे 125 दिन की जलापूर्ति हो सकेगी. गर्मियों में सागर में 40 से लेकर 60 दिनों की समस्या होती है. हालांकि, नई पाइपलाइन और अच्छी बारिश से बीते दो सालों से ऐसी स्थिति नहीं बनी है. लेकिन उसके पहले लोग परेशान होते रहे हैं. तब गर्मियों में 3 से 5 दिन तक छोड़कर जलापूर्ति की जाती थी.
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें