एशिया कप में भारतीय क्रिकेट टीम ने दमदार खेल दिखाते हुए खिताब पर कब्जा जमाया. यह टूर्नामेंट भारत के लिहाज से अगले साल होने जा रहे टी-20 वर्ल्डकप कप की तैयारी माना जा रहा है, जिसका मेजबान श्रीलंका है. यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले साल अमेरिका और वेस्टइंडीज की संयुक्त मेजबानी में हुआ वर्ल्डकप जीतने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज विराट कोहली, रोहित शर्मा और रविंद्र जडेजा ने टी-20 फार्मेट से संन्यास ले लिया था. ऐसे में भारत के सामने इन तीनों खिलाड़ियों की कमी पूरा कर एक मजबूत टीम तैयार करना चुनौती है.
एशिया कप में भारत के कई खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया. खासतौर से मैन ऑफ द टूर्नामेंट रहे अभिषेक शर्मा और तिलक वर्मा तथा वरुण चक्रवर्ती जैसे खिलाड़ियों ने शानदार खेल दिखाया, इससे चयनकर्ताओं को उन सवालों के जवाब भी मिल गए जो इन खिलाड़ियों को टीम में शामिल करते वक्त उनके जेहन में रहे होंगे.
एशिया कप में अभिषेक शर्मा ने अपनी शानदार बैटिंग से ये साबित किया कि वह टीम को रोहित शर्मा की कमी नहीं खलने देंगे. उन्होंने एशिप कप के 7 मैचों में 314 से ज्यादा रन बनाए. खास बात ये है कि उनका स्ट्राइक रेट पर 200 के आसपास रहा. इसका फायदा ये मिला कि हर मैच में भारतीय टीम को आक्रामक शुरुआत मिली. ये ठीक वैसा ही था, जब सहवाग के समय भारत को स्टार्ट मिलता था, सहवाग के बाद ये कमी रोहित शर्मा लगातार पूरी कर रहे थे, अब उनके बाद ये जिम्मेदारी अभिषेक शर्मा के कंधों पर थी. अभिषेक ने इसे साबित भी किया.
एक समय था जब सचिन, सहवाग, युवराज और गांगुली जैसे खिलाड़ी बल्लेबाजी में शानदार प्रदर्शन करने के साथ-साथ गेंदबाजी में भी अपना जौहर दिखाते थे, पिछले काफी समय में टीम को इस बात की कमी खल रही थी. दरअसल हमारे पास टॉप ऑर्डर पर शानदार बल्लेबाज तो थे, मगर ये गेंदबाजी में विकल्प नहीं बन पाते थे. अभिषेक शर्मा और तिलक वर्मा ने इस कमी को काफी हद तक दूर करने की कोशिश की है. दोनों ही बल्लेबाज टूर्नामेंट में बैट्समैन के तौर पर तो चमके ही, गेंदबाजी में भी हाथ दिखाए. तिलक ने तो एक विकेट भी हासिल किया.
भारतीय टीम में विराट कोहली ऐसे प्लेयर थे जो प्रेशर में शानदार खेल दिखाते थे. मिडिल ऑर्डर में तिलक वर्मा ने यह कमी पूरी की. फाइनल में जब भारतीय टीम नशुरुआत में तीन विकेट गंवा चुकी थी और एक बारगी लग रहा था मैच भारत के हाथ से जा रहा है तब तिलक वर्मा ने पारी को संभाला और प्रेशर में खेलते हुए संजू सैमसन और फिर शिवम दुबे के साथ बढ़िया साझेदारियां कीं और टीम को जीत की दहलीज तक पहुंचाया. ये ठीक उसी तरह था जैसा कि प्रेशर वाले मैचों में कोहली करते रहे हैं.
भारतीय टीम में गेंदबाजों की बात करें तो अक्सर इसका सारा भार जसप्रीत बुमराह पर रहता है, लेकिन इस टूर्नामेंट में अन्य गेंदबाजों ने भी उनका हाथ बंटाया. इस टूर्नामेंट में सर्वाधिक 17 विकेट कुलदीप यादव ने लिए. बुमराह का हाथ वरुण चक्रवर्ती ने बंटाया और दोनों ने सात-सात विकेट लिए. अक्षर पटेल ने 6, हार्दिक पांड्या ने 4 और शिवम दुबे ने 5 विकेट लेकर ये दर्शाया कि भारतीय टीम अब किसी एक प्लेयर के भरोसे नहीं है.
भारतीय बल्लेबाजी में मध्य क्रम को एक आलराउंडर के तौर पर हार्दिक पांड्या मजबूत बनाते हैं, लेकिन उनकी अनुपस्थिति में शिवम दुबे ने यह काम बखूबी किया. शिवम ने टूर्नामेंट में 5 विकेट लिए, जबकि हार्दिक पांड्या के नाम 4 विकेट ही रहे. फाइनल मुकाबले में भी शिवम दुबे ने एक प्रमुख गेंदबाज की भूमिका निभाई और 3 ओवर में 23 रन दिए.
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