फिल्मों को देख लिखी चौकीदारों की हत्या की स्क्रिप्ट: पुलिसवालों को भी मारना चाहता था, मगर एक गलती ने पहुंचाया सलाखों के पीछे – Madhya Pradesh News

फिल्मों को देख लिखी चौकीदारों की हत्या की स्क्रिप्ट:  पुलिसवालों को भी मारना चाहता था, मगर एक गलती ने पहुंचाया सलाखों के पीछे – Madhya Pradesh News


मध्यप्रदेश क्राइम फाइल्स के पार्ट 1 में आपने पढ़ा सागर में अगस्त 2022 में चार दिन में तीन हत्याएं हो जाती हैं। हर बार शिकार चौकीदार ही बने। हत्या का पैटर्न एक जैसा था। आधी रात, नींद में ड्यूटी करता गार्ड और सिर पर वार कर आरोपी उन्हें मौत के घाट उतार द

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लोग दहशत में आ गए थे और कह रहे थे। ‘शहर में कोई सीरियल किलर है’। पुलिस नाकाबंदी कर चुकी थी, रात-रात भर सर्चिंग चल रही थी। स्केच जारी किया गया मगर कातिल तक पुलिस नहीं पहुंच पा रही थी, लेकिन एक दिन पुलिस को वो सुराग मिला जिसने इस पूरे मामले की गुत्थी सुलझा दी और सीरियल किलर तक पुलिस को पहुंचा दिया।

कातिल कोई और नहीं एक 19 साल का लड़का था। जिसने अपना एक सपना पूरा करने के लिए बेगुनाहों के खून से अपने हाथ रंग लिए थे। कौन था ये लड़का… कैसे पकड़ा गया। पढ़िए आगे की कहानी

एक मोबाइल से मिला कातिल का सुराग सागर पुलिस की जांच टीमें जब हर तरफ से निराश हो चुकी थीं, तभी उन्हें एक तकनीकी सुराग मिला। आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज परिसर में मारे गए चौकीदार शंभूदयाल दुबे का मोबाइल फोन, जो हत्या के बाद से गायब था, अचानक भोपाल में कुछ सेकेंड के लिए चालू हुआ। सर्विलांस पर लगे इस नंबर ने जैसे ही सिग्नल दिया, सागर पुलिस मुख्यालय में हलचल मच गई।

अधिकारियों ने तुरंत एक 10 सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया और उन्हें दो गाड़ियों से भोपाल के लिए रवाना कर दिया। टीम का मकसद शुरू में यह पता लगाना था कि यह मोबाइल भोपाल कैसे पहुंचा और इसे कौन इस्तेमाल कर रहा है? उन्हें यह कतई अंदाजा नहीं था कि वे सीधे उस शख्स तक पहुंचने वाले हैं, जिसकी तलाश में पूरा पुलिस विभाग लगा हुआ था।

पुलिस की दो गाड़ियां रात में ही सागर से भोपाल पहुंच गई थीं।

पुलिस की दो गाड़ियां रात में ही सागर से भोपाल पहुंच गई थीं।

पुलिस ने सुबह 5 बजे किया गिरफ्तार भोपाल पहुंचने पर चुनौती और बढ़ गई, क्योंकि मोबाइल फिर से बंद हो चुका था। साइबर सेल की मदद से मिली आखिरी लोकेशन खजूरी थाना क्षेत्र की थी। पुलिस टीम ने कई घंटों तक उस इलाके की खाक छानी, लेकिन आरोपी का कोई पता नहीं चला। रात के लगभग 3:27 बजे, उस मोबाइल ने एक बार फिर सिग्नल दिया। इस बार लोकेशन लालघाटी इलाके की थी।

पुलिस ने बिना कोई समय गंवाए उस इलाके को घेर लिया और सुबह 5 बजे, जब शहर अभी नींद से जाग ही रहा था, उन्होंने एक युवक को दबोच लिया। वह देखने में साधारण और दुबला-पतला था, लेकिन उसकी आंखों में कोई पछतावा नहीं था। जब पुलिस ने उसका नाम पूछा, तो उसने बताया—”शिव प्रसाद।”

शिवप्रसाद को मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने पकड़ा।

शिवप्रसाद को मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने पकड़ा।

एक और हत्या करना कबूल की गिरफ्तारी के बाद जब सागर पुलिस की टीम युवक को लेकर वापस लौट रही थी, तो भोपाल से करीब 40 किलोमीटर दूर उसने एक ऐसा खुलासा किया जिसे सुनकर पुलिसकर्मियों के भी रोंगटे खड़े हो गए। उसने शांत भाव से बताया कि कुछ घंटे पहले ही उसने भोपाल में भी एक मार्बल की दुकान के गार्ड की हत्या कर दी है। सबूत के तौर पर भोपाल के उस गार्ड का मोबाइल फोन भी उसी के पास से बरामद हुआ।

सागर पुलिस ने तुरंत भोपाल पुलिस को सूचित किया। खजूरी रोड पुलिस जब घटनास्थल पर पहुंची, तो वहां का मंजर दिल दहला देने वाला था। 27 वर्षीय गार्ड सोनू वर्मा खून से लथपथ पड़ा था। 1 सितंबर की उस रात, लगभग 1:30 बजे, आरोपी ने सोनू को ड्यूटी पर सोते हुए देखा और मार्बल के एक भारी टुकड़े से उसके सिर पर वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया।

यह पूरी घटना पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी।

गांव के लड़के से सीरियल किलर बनने तक का सफर शिव प्रसाद उर्फ हल्कू, सागर जिले के केसली ब्लॉक के एक छोटे से गांव केंकरा का रहने वाला था। 19 साल का यह युवक 8वीं तक पढ़ा था, लेकिन उसका स्वभाव बचपन से ही आक्रामक और लड़ाकू था। स्कूल में छोटी-छोटी बातों पर सहपाठियों को पीट देना उसकी आदत थी। गांव में उसका कोई दोस्त नहीं था, क्योंकि वह सबसे झगड़ता रहता था।

महज 13 साल की उम्र में, 6 साल पहले, वह घर से भागकर सागर आ गया और वहां से ट्रेन पकड़कर पुणे पहुंच गया। पुणे में उसने एक होटल में काम करना शुरू किया। वह कभी-कभार गांव आता भी तो किसी से मिलता-जुलता नहीं था। एक दिन होटल मालिक से किसी बात पर उसका विवाद हुआ और उसने मालिक को इतना पीटा कि उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

इस घटना के बाद शिव को बाल सुधार गृह भेज दिया गया। उसके पिता नन्हे आदिवासी उसे छुड़ाकर वापस लाए, लेकिन वह नहीं सुधरा।

इस घटना के बाद शिव को बाल सुधार गृह भेज दिया गया। उसके पिता नन्हे आदिवासी उसे छुड़ाकर वापस लाए, लेकिन वह नहीं सुधरा।

गोवा में अंग्रेजी सीखी बाल सुधार गृह से बाहर आने के बाद शिव गोवा चला गया, जहां उसने काम करते-करते अंग्रेजी बोलना और समझना भी सीख लिया। कुछ समय बाद वह वापस अपने गांव लौटा और यहीं से उसके खूनी खेल की पटकथा शुरू हुई। 25 अगस्त 2022 को शिव अपनी साइकिल से 65 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके सागर पहुंचा था।

उसने कोतवाली क्षेत्र की एक धर्मशाला में कमरा लिया और अपने पहले शिकार की तलाश शुरू कर दी थी। सागर में एक के बाद एक तीन हत्याएं कर उसने सनसनी फैला दी थी। इसके बाद 30 अगस्त को वह ट्रेन से भोपाल आ गया, क्योंकि उसे एहसास हो गया था कि सागर पुलिस उसके पीछे पड़ चुकी है। भोपाल में वह रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के आसपास भटकता रहा और मौके की तलाश में था, जो उसे सोनू वर्मा के रूप में मिला।

फेमस होना और गैंगस्टर बनने का अधूरा सपना पुलिस की पूछताछ में शिव ने जो खुलासा किया, वह किसी भी मनोवैज्ञानिक को हैरान कर सकता था। उसने कबूल किया कि इन हत्याओं के पीछे उसका मकसद सिर्फ और सिर्फ “फेमस” होना था। वह एक गैंगस्टर बनना चाहता था और इसके लिए उसने सबसे आसान रास्ता चुना। सुनसान इलाकों में रात में सो रहे चौकीदार उसके लिए “सॉफ्ट टारगेट” थे, जिन्हें वह एक-एक कर मारता गया।

उसने पुलिस को बताया कि उसका अगला निशाना पुलिसकर्मी थे। उसे इस बात का मलाल था कि वह गरीबों को मार रहा है, लेकिन उसे अपने गैंगस्टर बनने के सपने के अधूरे रह जाने का अफसोस ज्यादा था। जेल ले जाते समय उसने पुलिसकर्मियों से कहा,

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मैंने गलत तो किया है… अब लगता है कि गरीबों को नहीं मारना था, बुरे लोगों को टारगेट करना था। मुझे तो पुलिस को भी निशाना बनाना था। बस कोई हथियार हाथ आ जाता, तो काम कर देता। सपना तो बड़ा देखा था, गैंगस्टर बनने का, मगर अफसोस है कि अधूरा रह गया। शायद, मैंने समय और जगह गलत चुन ली, इसलिए पकड़ा गया।

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पुलिस गिरफ्त में आने के बाद शिव को जेल भेज दिया गया था।

पुलिस गिरफ्त में आने के बाद शिव को जेल भेज दिया गया था।

KGF-2, पुष्पा और हैकर फिल्मों ने लिखी थी जुर्म की स्क्रिप्ट

जांच में यह बात सामने आई कि शिव प्रसाद की अपराध की दुनिया पूरी तरह से फिल्मों से प्रेरित थी। उसने तीन फिल्मों—KGF-2, पुष्पा और हैकर—को देखकर अपने गैंगस्टर बनने की पूरी स्क्रिप्ट लिखी थी। उज्जैन का गैंगस्टर दुर्लभ कश्यप उसका रोल मॉडल था और वह उसी की तरह बनना चाहता था।

KGF-2: इस फिल्म के किरदार ‘रॉकी भाई’ की तरह वह एक आम इंसान से डॉन बनने का सपना देखता था। फिल्म के एक्शन और मर्डर सीन ने उसे बहुत प्रभावित किया।

पुष्पा: इस फिल्म के नायक की तरह वह भी साइकिल का इस्तेमाल करता था। केसली से सागर तक 65 किलोमीटर का सफर उसने साइकिल से ही तय किया था। इतना ही नहीं, पकड़े जाने के बाद उसने पुलिस के सामने झुकने की बजाय ‘पुष्पा’ की तरह ही विक्ट्री साइन दिखाया, जैसे उसे अपने किए पर कोई अफसोस न हो।

हैकर: इस फिल्म से प्रेरणा लेकर उसने साइबर तकनीक सीखने की कोशिश की। यही वजह थी कि उसने शंभूदयाल दुबे का मोबाइल चुराने के बाद उसका पैटर्न लॉक खुद ही खोल लिया था।

शिव पुष्पा, हैकर और केजीएफ से प्रेरित था।

शिव पुष्पा, हैकर और केजीएफ से प्रेरित था।

मां को बोला था- लोग मुझे पहचानने लगेंगे गिरफ्तारी के बाद जब शिव के माता-पिता उससे मिलने सागर पहुंचे, तो माहौल गमगीन हो गया। अपनी मां को देखकर शिव ने बस इतना कहा, “मुझसे गलती हो गई।” यह सुनकर उसकी मां सीताबाई रो पड़ीं। उन्होंने पुलिस को बताया कि रक्षाबंधन पर जब शिव घर आया था, तो उसके स्वभाव में ऐसा कुछ भी नहीं लगा था, जिससे शक हो।

मां ने बताया कि उसने एक बात जरूर कही थी, “जल्द ही लोग मुझे पहचानने लगेंगे।” उस समय किसी ने सोचा भी नहीं था कि उनका बेटा “पहचान” बनाने के लिए यह खूनी रास्ता चुनेगा।

शिवप्रसाद के माता-पिता, जिन्हें यकीन ही नहीं हुआ था कि बेटे ने चार हत्याएं की हैं।

शिवप्रसाद के माता-पिता, जिन्हें यकीन ही नहीं हुआ था कि बेटे ने चार हत्याएं की हैं।

अदालत ने सुनाई उम्रकैद की सजा सागर पुलिस ने तेजी से जांच पूरी की और आरोपी शिव प्रसाद के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद उसे बेगुनाह चौकीदारों की हत्या का दोषी पाया और उम्रकैद की सजा सुनाई। एक फिल्मी गैंगस्टर बनने का सपना देखने वाला युवक अब अपनी पूरी जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे बिताएगा।

क्राइम फाइल्स का पार्ट-1 भी पढ़िए

आधी रात को हत्या करने निकलता…चौकीदार देखते ही मार डालता:साइको किलर हथौड़ा, पत्थर, फावड़ा जो मिलता उससे जान लेता; 4 दिन में 3 कत्ल

मध्यप्रदेश क्राइम फाइल्स में इस बार बात सागर शहर की। 3 साल पहले सागर 4 दिन के भीतर लगातार तीन हत्याओं से दहल उठा था। तीन रातें, तीन चौकीदार और मौत का एक ही तरीका। कोई निशान नहीं, कोई मकसद नहीं। बस सिर पर वार और मौत। लोग सिहर उठे थे। हर कोई आशंका जता रहा था कि कहीं शहर में कोई सीरियल किलर तो सक्रिय नहीं है? पूरी खबर पढ़ें



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