सिंगरौली में नगर निगम अध्यक्ष पर अविश्वास प्रस्ताव: कांग्रेस-AAP-बसपा ने दिया आवेदन; BJP पार्षदों ने कुर्सी सुरक्षित होने का दावा किया – Singrauli News

सिंगरौली में नगर निगम अध्यक्ष पर अविश्वास प्रस्ताव:  कांग्रेस-AAP-बसपा ने दिया आवेदन; BJP पार्षदों ने कुर्सी सुरक्षित होने का दावा किया – Singrauli News



अविश्वास प्रस्ताव के जबाब में भाजपा ने पार्षदों की परेड कराई।

सिंगरौली में नगर निगम अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के आवेदन के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। मंगलवार को कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के पार्षदों ने कलेक्टर को अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए आवेदन दिया था।

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भाजपा ने पार्षदों की परेड कर संख्या बल का दावा किया

इसके जवाब में, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आज बुधवार को अपने पार्षदों की मीडिया के सामने परेड कराई और अध्यक्ष की कुर्सी सुरक्षित होने का दावा किया। घटनाक्रम मंगलवार को शुरू हुआ जब विपक्षी दलों के पार्षदों ने नगर निगम अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कलेक्टर को एक संयुक्त आवेदन दिया। इस कदम से शहर की राजनीति में हलचल मच गई।

जवाब में, भाजपा के सिंगरौली जिला अध्यक्ष सुंदरलाल शाह, सिंगरौली विधायक रामनिवास शाह और नगर निगम अध्यक्ष देवेश पांडे ने मीडिया के सामने अपने पार्षदों को पेश किया।

उन्होंने दावा किया कि अध्यक्ष देवेश पांडे को किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं है और उनके पास पर्याप्त संख्या बल है। विधायक रामनिवास शाह ने कहा कि भाजपा के पास पर्याप्त संख्या बल है और कोई भी उनके अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं करवा सकता।

अध्यक्ष देवेश पांडे ने विपक्षी प्रस्ताव को ‘गंदी राजनीति’ बताया

उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा के पार्षदों के अलावा, विपक्ष के 5 से 6 पार्षद भी उनके संपर्क में हैं और आवश्यकता पड़ने पर वे भी भाजपा के पक्ष में मतदान करेंगे। नगर निगम अध्यक्ष देवेश पांडे ने इस अविश्वास प्रस्ताव को ‘गंदी राजनीति’ करार दिया। उन्होंने कहा कि यह कदम आम आदमी पार्टी की महापौर रानी अग्रवाल के कथित भ्रष्टाचारों को उजागर करने और उन पर कार्रवाई करने के बाद उठाया गया है।

पांडे ने आरोप लगाया कि यह सब अपने भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए किया जा रहा प्रोपेगेंडा है। विपक्ष की ओर से अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन दिए जाने के बाद से ही शहर की राजनीति गरमाई हुई है। दोनों पक्ष अपने-अपने संख्या बल के दावे कर रहे हैं। नियमानुसार, अविश्वास प्रस्ताव पर निर्णय लेने में लगभग 10 दिन का समय लगेगा, जिसके बाद ही यह तय होगा कि संख्या बल किसके पक्ष में है।



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