Agri Tips: अब नहीं सूखेगी चना और गेहूं की फसल! बुआई से पहले डालें यह देसी घोल, होगा बंपर उत्पादन

Agri Tips: अब नहीं सूखेगी चना और गेहूं की फसल! बुआई से पहले डालें यह देसी घोल, होगा बंपर उत्पादन


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मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में रबी सीजन की बुआई शुरू हो चुकी है. अक्सर किसानों की चना और गेहूं की फसल कुछ ही दिनों में सूख जाती है, लेकिन कृषि वैज्ञानिकों ने इसका देसी हल खोज लिया है. ट्रायकोडरमा और गोबर खाद से तैयार घोल खेत में डालने से फसल सुखाने वाले फंगस खत्म हो जाते हैं.

चना और गेहूं की फसल के लिए देसी घोल.

Khargone News: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में रबी सीजन में किसान भाई गेहूं और चना की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं. करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में इस बार चना की खेती का लक्ष्य कृषि विभाग ने रखा है. अक्टूबर महीने की शुरुआत के साथ ही किसान बुआई की तैयारियों में जुट गए हैं. लेकिन, किसानों के सामने अकसर यह समस्या आती है कि बुआई के कुछ दिन बाद ही चना या गेहूं की फसल अचानक सूख जाती है.

खासतौर से जिन किसानों के पास केवल एक ही खेत है और वे फसल चक्र नहीं अपना पाते, उनके लिए यह समस्या और ज्यादा गंभीर हो जाती है. ऐसी स्थिति में मेहनत और लागत दोनों बेकार चली जाती है. परन्तु अब कृषि वैज्ञानिकों ने इसका भी हल खोज लिया है. उनका मानना है कि बुआई से पहले किसान भाई एक देसी एवं टिकाऊ घोल बनाकर खेतों में डाल दे तो इससे बचाव संभव है.

कैसे तैयार करें देसी घोल

कृषि वैज्ञानिक डॉ. आर.के. सिंह बताते हैं कि किसान भाई चाहें तो खेत में ही ऐसा घोल तैयार कर सकते हैं, जो फसल सुखाने वाले फंगस को पूरी तरह खत्म कर देगा. इसके लिए केवल 2 किलो ट्रायकोडरमा और 50 किलो अच्छी तरह सड़ी (पकी) हुई गोबर की खाद की जरूरत होगी. दोनों को मिलाकर तैयार घोल को 3-4 दिन तक छांव में रख दें. इस दौरान ट्रायकोडरमा तेजी से बढ़ेगा और खेत में डालने पर रोग पैदा करने वाले फंगस को नष्ट कर देगा.

खेतों में घोल डालने का फायदा
विशेषज्ञों का कहना है कि तैयार घोल को बुआई से पहले प्रति एकड़ खेत में डाल देना चाहिए. इससे मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ेगी, पौधों की जड़ें मजबूत होंगी और फसल में सुखाने जैसी समस्या नहीं आएगी. खास बात यह है कि यह तरीका पूरी तरह देसी और टिकाऊ है, जिसे किसान बिना ज्यादा खर्च किए आसानी से अपना सकते हैं.

बीज उपचार भी जरूरी
डॉ. सिंह किसानों को सलाह देते हुए कहा कि बुआई से पहले बीज का उपचार करना भी जरूरी है. यदि बीजोपचार किया जाए तो बीज पर मौजूद रोगाणु भी खत्म हो जाएंगे और फसल का अंकुरण बेहतर होगा. इस देसी उपाय से चना, गेहूं और अन्य रबी फसलें सुरक्षित रहेंगी और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी.

Dallu Slathia

Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें

Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across … और पढ़ें

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