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Dhruv Jurel Century: ध्रुव जुरेल को टेस्ट टीम में ऋषभ पंत के स्थान पर मौका दिया गया. पंत चोटिल हैं. जिसके चलते फिलहाल उनकी वापसी में वक्त लगना तय है. जुरेल ने मौके का फायदा उठाते हुए वेस्टइंडीज के खिलाफ अहमदाबाद टेस्ट में शतक जड़ दिया.
ऋषभ पंत चोटिल होने के कारण अहमदाबाद टेस्ट में टीम से बाहर थे. ऐसे में उनकी जगह ध्रुव जुरेल को मौका मिला. दबाव के बावजूद उन्होंने संयमित बल्लेबाजी कर शतक जड़ा. यह प्रदर्शन साबित करता है कि भारतीय टीम के पास पंत की गैरमौजूदगी में भी एक भरोसेमंद विकेटकीपर-बल्लेबाज मौजूद है, जो मैच का रुख बदलने की क्षमता रखता है.

ध्रुव जुरेल ने शतक जड़कर एक खास क्लब में जगह बनाई. वह टेस्ट क्रिकेट में शतक लगाने वाले 12वें भारतीय विकेटकीपर बने हैं. वहीं, ऋषभ पंत भी इस लिस्ट का हिस्सा हैं और कई मौकों पर शतकीय पारी खेल चुके हैं. यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत को लंबे समय बाद विकेटकीपर-बल्लेबाजों की एक मजबूत जोड़ी मिली है.

ऋषभ पंत और ध्रुव जुरेल की बैटिंग शैली भले ही अलग हो, लेकिन दोनों में एक समानता है और वो है बड़ी पारियां खेलने की क्षमता. पंत आक्रामक अंदाज में रन जुटाते हैं, वहीं जुरेल धैर्य से खेल को आगे बढ़ाते हैं. दोनों ही परिस्थितियों के हिसाब से खेल बदलने वाले बल्लेबाज हैं और टीम इंडिया के लिए बड़े मैच विनर साबित हो सकते हैं.

जुरेल ने वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना पहला टेस्ट शतक लगाया. मजेदार बात यह है कि पंत ने भी अपने करियर के शुरुआती दौर में विंडीज के खिलाफ शानदार पारियां खेली थीं. दोनों का यह रिकॉर्ड दिखाता है कि कैरेबियाई टीम के खिलाफ भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज अक्सर खास प्रदर्शन करते हैं और अपने करियर को नई दिशा देते हैं.

ऋषभ पंत ने कई बार चौथी पारी में मैच जिताने वाली पारियां खेलीं, जिससे उनकी दबाव झेलने की क्षमता सामने आई. ध्रुव जुरेल ने भी अहमदाबाद टेस्ट में शतक बनाकर यह साबित किया कि वह कठिन परिस्थितियों में टीम को संभाल सकते हैं. ऐसे खिलाड़ी किसी भी टीम के लिए अनमोल होते हैं, खासकर जब नियमित स्टार खिलाड़ी उपलब्ध न हों.

ऋषभ पंत की सबसे बड़ी ताकत उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी है. वह टेस्ट क्रिकेट में भी तेजी से रन बनाकर विपक्षी टीम का दबाव बढ़ा देते हैं. ध्रुव जुरेल तकनीकी रूप से मजबूत हैं लेकिन पंत जैसी निडरता और स्ट्राइक रेट फिलहाल उनके खेल में नहीं दिखती. यही कारण है कि पंत को रिप्लेस करना इतना आसान नहीं है.

पंत ने ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी टीमों के खिलाफ चौथी पारी में मैच जिताने वाली पारियां खेली हैं. संकट की घड़ी में उनके शॉट्स विपक्षी टीम का मनोबल तोड़ देते हैं. जुरेल में हुनर है लेकिन अभी उन्होंने ऐसे मैच विनिंग प्रदर्शन नहीं किए. अनुभव और बड़े मौकों पर खुद को साबित करना उन्हें पंत से अलग करता है.