Bihar Chunav 2025: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में मध्य प्रदेश की प्रदेश कार्यसमिति और 40 स्वतंत्र बोर्डों व निगमों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर काफी समय से चर्चा और विचार-विमर्श चल रहा है. लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि इन नियुक्तियों की औपचारिक घोषणा को आगामी बिहार विधानसभा चुनाव तक के लिए टाल दिया गया है. पार्टी के सूत्रों ने बुधवार को बताया कि इस समय संगठन का पूरा ध्यान बिहार के महत्वपूर्ण चुनावी मुकाबले पर केंद्रित है. बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव को पार्टी बहुत गंभीरता से ले रही है, और इस वजह से मध्य प्रदेश में नई नियुक्तियों की प्रक्रिया को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया है.
बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारियों में भाजपा के कई बड़े नेता पूरी तरह से जुट गए हैं. मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वी. डी. शर्मा, प्रदेश संगठन महासचिव हितानंद शर्मा, पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया और युवा मामलों के मंत्री विश्वास सारंग जैसे दिग्गज नेताओं को बिहार में चुनावी ड्यूटी पर भेजा गया है. ये नेता फिलहाल बिहार में तैनात हैं और वहां की रणनीति को मजबूत करने में लगे हुए हैं. पार्टी का मानना है कि बिहार का चुनाव उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है, और इस वजह से मध्य प्रदेश में संगठनात्मक नियुक्तियों को अभी प्राथमिकता नहीं दी जा रही है.
जिला कार्यसमितियों और बोर्डों की नियुक्तियों में देरी
मध्य प्रदेश में भाजपा ने अब तक 35 जिला कार्यसमितियों के सदस्यों के नामों की घोषणा कर दी है. लेकिन अभी भी 28 जिला कार्यसमितियों के नामों की घोषणा बाकी है. एक वरिष्ठ भाजपा पदाधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि शेष जिला कार्यसमितियों की घोषणा तो जल्द ही हो सकती है, लेकिन बोर्डों और निगमों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों की नियुक्ति की घोषणा की संभावना कम है. उन्होंने कहा कि ये घोषणाएं शायद बिहार चुनाव के बाद ही होंगी. इसके अलावा, राज्य कार्यसमिति के सदस्यों की नियुक्ति के लिए भी अभी इंतजार करना होगा.
पार्टी के इस फैसले के पीछे कई कारण हैं. सबसे बड़ा कारण यह है कि बिहार का चुनाव भाजपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक अवसर है. पार्टी नहीं चाहती कि इस समय संगठन के भीतर किसी तरह की चर्चा या असहमति की स्थिति बने, जो बिहार चुनाव में उनकी रणनीति को प्रभावित करे. इसलिए, मध्य प्रदेश में नई नियुक्तियों को लेकर चल रही माथापच्ची को कुछ समय के लिए टाल दिया गया है.
बी. एल. संतोष का दौरा और चर्चाएं
इस साल अगस्त के आखिरी सप्ताह में भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बी. एल. संतोष ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का दो दिवसीय दौरा किया था. इस दौरान पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और स्वतंत्र राज्य निगमों व बोर्डों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा हुई. इस बैठक में कई वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया और संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विचार-विमर्श किया गया. लेकिन इस चर्चा के दौरान सभी नेता नामों के चयन से पूरी तरह सहमत नहीं थे. कुछ नेताओं को लगता था कि कुछ और नामों पर विचार किया जाना चाहिए, जबकि कुछ अन्य नेताओं के अपने सुझाव थे. इस वजह से आम सहमति नहीं बन पाई, और नियुक्तियों की घोषणा को टाल दिया गया.
इसके अलावा, हिंदू धर्म में श्राद्ध पक्ष के 15 दिनों के दौरान कोई भी नई घोषणा या बड़े फैसले लेने से बचा जाता है. इस साल सितंबर में श्राद्ध पक्ष के कारण भी नियुक्तियों की घोषणा में देरी हुई. हिंदू परंपराओं के अनुसार, इस दौरान शुभ कार्यों को टाल दिया जाता है, और यही कारण रहा कि भाजपा ने इस समय कोई औपचारिक घोषणा नहीं की.
मंत्रिमंडल विस्तार पर भी चर्चा
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में नई दिल्ली का दौरा किया और वहां पार्टी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने राज्य मंत्रिमंडल के विस्तार की जरूरत पर जोर दिया. मुख्यमंत्री का मानना है कि मंत्रिमंडल में कुछ नए चेहरों को शामिल करके सरकार को और मजबूत किया जा सकता है. लेकिन सूत्रों के अनुसार, पार्टी आलाकमान ने इस पर भी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है. शीर्ष नेताओं का कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव के बाद ही इस मुद्दे पर विचार किया जाएगा. इसके साथ ही, भाजपा के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को भी बिहार चुनाव तक के लिए टाल दिया गया है.
पार्टी की लोकतांत्रिक प्रक्रिया
प्रदेश भाजपा प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए कहा कि भाजपा एक लोकतांत्रिक पार्टी है, और किसी भी बड़े फैसले से पहले सभी वरिष्ठ नेताओं की राय ली जाती है. उन्होंने बताया कि प्रदेश कार्यसमिति के सदस्यों और निगम-मंडलों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों की नियुक्ति से पहले सभी नेताओं से चर्चा की जाएगी. अजय सिंह यादव ने कहा, “हमारी पार्टी में हर फैसला लोकतांत्रिक तरीके से लिया जाता है. बिहार चुनाव के कारण हमारे कई बड़े नेता अभी व्यस्त हैं. लेकिन जल्द ही सभी नेताओं से विचार-विमर्श के बाद नई नियुक्तियों की घोषणा की जाएगी.”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि पार्टी उन कार्यकर्ताओं को पुरस्कृत करना चाहती है, जिन्होंने विधानसभा और लोकसभा चुनावों में कड़ी मेहनत की है. ऐसे कार्यकर्ताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाएंगी, ताकि उनकी मेहनत को सम्मान मिले.
बिहार चुनाव की रणनीति
बिहार विधानसभा चुनाव को भाजपा अपने लिए बहुत महत्वपूर्ण मान रही है. यह चुनाव न केवल बिहार में पार्टी की स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ेगा. इसीलिए पार्टी ने अपने कई दिग्गज नेताओं को बिहार में तैनात किया है. कैलाश विजयवर्गीय जैसे नेता, जो मध्य प्रदेश में संगठन और सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, बिहार में चुनावी रणनीति को मजबूत करने में जुटे हैं. वी. डी. शर्मा और हितानंद शर्मा जैसे नेता भी बिहार में पार्टी के प्रचार और संगठन को मजबूत करने में लगे हैं.
पार्टी का मानना है कि बिहार में जीत हासिल करने के लिए सभी संसाधनों का उपयोग करना जरूरी है. इस वजह से मध्य प्रदेश में संगठनात्मक नियुक्तियों को कुछ समय के लिए टाल दिया गया है. पार्टी के नेता नहीं चाहते कि इस समय कोई ऐसा फैसला लिया जाए, जिससे संगठन के भीतर असहमति की स्थिति बने.
संगठन में कार्यकर्ताओं का महत्व
भाजपा हमेशा से अपने कार्यकर्ताओं को महत्व देती रही है. पार्टी का मानना है कि कार्यकर्ता ही संगठन की रीढ़ हैं. इसीलिए, नई नियुक्तियों में उन कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में कड़ी मेहनत की है. पार्टी चाहती है कि ऐसे कार्यकर्ताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर उनकी मेहनत को सम्मान दिया जाए.
प्रदेश कार्यसमिति और निगम-मंडलों में नियुक्तियां करते समय पार्टी यह सुनिश्चित करेगी कि सभी क्षेत्रों और समुदायों का उचित प्रतिनिधित्व हो. इसके लिए पार्टी के शीर्ष नेता सभी वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं से चर्चा करेंगे, ताकि कोई भी फैसला सर्वसम्मति से लिया जाए.
भविष्य की योजनाएं
बिहार विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा मध्य प्रदेश में संगठनात्मक नियुक्तियों पर तेजी से काम शुरू करेगी. पार्टी के नेता चाहते हैं कि सभी नियुक्तियां जल्द से जल्द पूरी हो जाएं, ताकि संगठन और मजबूत हो सके. इसके अलावा, मंत्रिमंडल विस्तार पर भी विचार किया जाएगा. मुख्यमंत्री मोहन यादव और पार्टी के शीर्ष नेता इस बात पर सहमत हैं कि सरकार और संगठन को और प्रभावी बनाने के लिए कुछ नए चेहरों को शामिल करना जरूरी है.
पार्टी यह भी सुनिश्चित करेगी कि नियुक्तियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे. सभी वरिष्ठ नेताओं की राय को महत्व दिया जाएगा, और कोई भी फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया जाएगा. भाजपा का मानना है कि संगठन की मजबूती ही सरकार की सफलता की कुंजी है.
भाजपा मध्य प्रदेश में संगठनात्मक नियुक्तियों और मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर बहुत सावधानी से काम कर रही है. बिहार विधानसभा चुनाव के कारण इन फैसलों को कुछ समय के लिए टाल दिया गया है, लेकिन पार्टी का ध्यान इस बात पर है कि सभी नियुक्तियां निष्पक्ष और लोकतांत्रिक तरीके से हों. बिहार चुनाव के बाद पार्टी मध्य प्रदेश में संगठन को और मजबूत करने के लिए तेजी से कदम उठाएगी. कार्यकर्ताओं की मेहनत को सम्मान देने और संगठन में सभी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए पार्टी प्रतिबद्ध है.
इस तरह, भाजपा एक बार फिर यह साबित कर रही है कि वह न केवल एक मजबूत संगठन है, बल्कि एक ऐसी पार्टी भी है जो अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं की राय को महत्व देती है. बिहार चुनाव के बाद मध्य प्रदेश में नई नियुक्तियों की घोषणा के साथ ही पार्टी एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ेगी.