छिंदवाड़ा कांड: MP में ‘जहर’ निकला बच्चों का Coldrif कफ सिरप! रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

छिंदवाड़ा कांड: MP में ‘जहर’ निकला बच्चों का Coldrif कफ सिरप! रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा


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MP Coldrif Cough Syrup News: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में Coldrif कफ सिरप पीने से कई बच्चों की मौत हो गई. जांच में पता चला कि इस सिरप में खतरनाक डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की मात्रा तय सीमा से बहुत अधिक थी.

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Coldrif सिरप बना काल

Coldrif Cough Syrup News: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में खांसी की दवा कोल्ड्रिफ कफ सिरप के सेवन से कई बच्चों की मौत का दुखद मामला सामने आया है. इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है. बच्चों की जान जाने के बाद सरकार ने इस दवा की जांच शुरू कर दी, जो अब तक लगातार जारी है. इस मामले ने दवा उद्योग में गुणवत्ता और सुरक्षा के मुद्दों को उजागर किया है.

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने कोल्ड्रिफ सिरप के 6 सैंपल जांचे, जिनमें खतरनाक रसायन डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) या ईथाइलीन ग्लाइकॉल (ईजी) नहीं पाया गया. मध्य प्रदेश फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमपीएफडीए) ने भी 13 सैंपल लिए, जिनमें से 3 की जांच पूरी हुई और वे सुरक्षित पाए गए. लेकिन जांच यहीं खत्म नहीं हुई. मध्य प्रदेश सरकार के अनुरोध पर तमिलनाडु फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने कांचीपुरम की एम/एस स्रेसन फार्मा कंपनी से इस सिरप के सैंपल लिए. 3 अक्टूबर 2025 की रात को आई जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ. इस सिरप के बैच नंबर एसआर-13 में डीईजी की मात्रा तय सीमा से कहीं ज्यादा (48.6% तक) पाई गई.

DEG क्या होता है?
DEG एक जहरीला रसायन है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर पेंट, ब्रेक ऑयल और प्लास्टिक बनाने में होता है. दवाओं में इसकी बहुत सीमित मात्रा की अनुमति होती है, जो शरीर को नुकसान न पहुंचाए. लेकिन कोल्ड्रिफ सिरप में डीईजी की इतनी ज्यादा मात्रा थी कि यह बच्चों के लिए जानलेवा साबित हुई. यह रसायन किडनी और लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है, नसों पर असर डाल सकता है और खासकर छोटे बच्चों के लिए घातक है. इस खुलासे के बाद तमिलनाडु सरकार ने कंपनी का लाइसेंस निलंबित कर दिया, उत्पादन रोक दिया और सारा स्टॉक जब्त कर लिया.

आगे क्या हो रहा है?
इस घटना के बाद 3 अक्टूबर से देश के 6 राज्यों में 19 दवा उत्पादन स्थलों पर सघन जांच शुरू हो गई है. इसका मकसद यह पता लगाना है कि दवा की गुणवत्ता में कमी कहां हुई और भविष्य में ऐसी गलतियां कैसे रोकी जाएं. राष्ट्रीय वायरलॉजी इंस्टीट्यूट (एनआईवी), इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर), नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनईईआरआई), सीडीएससीओ और एम्स नागपुर की टीमें अलग-अलग सैंपल और परिस्थितियों की जांच कर रही हैं. ये टीमें यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि छिंदवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में बच्चों की मौत का सही कारण क्या था. एक बच्चे में लेप्टोस्पायरोसिस नामक बीमारी की पुष्टि हुई है, इसलिए दूषित पानी या अन्य संक्रमणों की भी जांच की जा रही है.

मध्य प्रदेश सरकार ने इस दुखद घटना को गंभीरता से लिया है. दवा की बिक्री पर रोक के साथ-साथ दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया गया है. सरकार ने दवा उद्योग में गुणवत्ता जांच को और सख्त करने का फैसला किया है. माता-पिता को सलाह दी गई है कि बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चों को कोई दवा न दें. यह घटना दवा कंपनियों और नियामक संस्थाओं के लिए एक बड़ा सबक है. उम्मीद है कि जांच से सच्चाई सामने आएगी और भविष्य में ऐसी त्रासदी को रोका जा सकेगा.

Anuj Singh

Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has worked a…और पढ़ें

Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has worked a… और पढ़ें

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