मिट्टी का बंडा, नीम की पत्ती, भूसा…कई क्विंटल गेहूं महीनों रहेगा सुरक्षित, सालों पुराना तरीका आज भी कारगर

मिट्टी का बंडा, नीम की पत्ती, भूसा…कई क्विंटल गेहूं महीनों रहेगा सुरक्षित, सालों पुराना तरीका आज भी कारगर


Last Updated:

Gehun Rakhne Ka Tarika: छतरपुर के गांवों में गेहूं को सुरक्षित रखने के लिए आज भी ऐसे पुराने तरीके अपनाए जाते हैं, जिससे गेहूं महीनों खराब नहीं होता है.न ही इसमें किसी भी के केमिकल या दवा की जरूरत पड़ती है. खर्च भी बेहद कम. जानें विधि

Wheat Storage Tips: कहावत है न…नया नौ दिन और पुराना सौ दिन. कहने का आशय बस इतना कि आज की आधुनिक चीजें कुछ दिन ही कारगर होती हैं, लेकिन पुराने तौर-तरीके आज भी कारगर हैं. खासकर गेहूं रखने के मामले में ये कहना गलत नहीं होगा. आज शहर में गेहूं स्टोरेज के लिए महंगे-महंगे ड्रम, टंकी आदि खरीदी जाती है, लेकिन गांव में आज भी पुराते तरीकों से काम चल रहा है. मध्य प्रदेश के छतरपुर के गांवों में भी कुछ ऐसा ही तरीका देखने को मिला. यहां गेहूं को सुरक्षित रखने के लिए सालों पुराने तरीके अपनाए जा रहे हैं. इससे गेहूं महीनों खराब भी नहीं होता है और न ही इसमें किसी भी तरह की केमिकल या दवा डालने की जरूरत होती है.

मिट्टी के बंडा बनाते थे 
गांव के कालीचरण बताते हैं कि गेहूं को सुरक्षित रखने के लिए पहले कुछ पुराने तरीके अपनाए जाते थे. हमारे यहां मिट्टी के बंडा बनाए जाते थे. चारों तरफ से मिट्टी की दीवार बना देते थे. इसके बाद अंदर नीम की पत्तियां रख देते थे. इसके बाद गेहूं डालते थे. ऐसे ही पूरा गेहूं भरते थे. गेहूं के बीच-बीच में नीम की पत्तियां रखकर गेहूं डालते थे. इसके बाद ऊपर से पयार-भूसा रख देते थे. इस तरह सालभर कई क्विटल गेहूं सुरक्षित रहता था. 50 से लेकर 100 मन तक गेहूं रखने का बंडा बनाया जाता था.

खउंड़ा बनाकर सुरक्षित करते थे 
वहीं, ग्रामीण सीताराम बताते हैं कि बंडा के अलावा एक और तरीका अपनाया जाता था. इस तरीके में जमीन के नीचे पक्का टंकीनुमा आकार का कुआं बनाया जाता था. इसमें गेहूं भर दिया जाता था. इसके बाद इसे पक्के तरीके से ढंक देते थे. अगर सालों बाद भी गेहूं निकालते थे तो भी बिल्कुल साफ निकलता था. इसमें किसी भी तरह का घुन नहीं लगता था.

मिट्टी की गुठली बनाई जाती थी
कालीचरण बताते हैं कि गेहूं को सुरक्षित रखने के लिए एक और तरीका अपनाया जाता था. इस तरीके में मिट्टी से टंकीनुमा गुठली बनाई जाती थी. इस टंकी को माटी की गुठली कहा जाता था. इसमें 10 मन गेहूं रखने की जगह होती थी.

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
homelifestyle

मिट्टी का बंडा, नीम की पत्ती, भूसा…कई क्विंटल गेहूं महीनों रहेगा सुरक्षित



Source link