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Balaghat News: नर बाघ अगर किसी बाघिन को देखता है और उसे उसके पास शावक दिखते हैं, जो किसी और नर से हुए हैं, तो यह बात बाघ को बर्दाश्त नहीं होती है. ऐसे में वह उन शावकों को मार डालता है.
बालाघाट. मध्य प्रदेश का कान्हा नेशनल पार्क तीन महीने बाद एक अक्टूबर को पर्यटकों के लिए खुला. पर्यटकों को आना-जाना फिर शुरू हो गया लेकिन दो अक्टूबर को एक ऐसी खबर आई, जिससे पर्यावरण प्रेमी निराश हो गए. दरअसल दो अक्टूबर को दो अलग- अलग घटनाओं में तीन बाघों की मौत हो गई. इसमें दो मादा और एक नर बाघ था. मामला मुण्डीदादर बीट के कक्ष क्रमांक 119 वन परिक्षेत्र का है. स्थानीय हाथी गश्त दल के मुताबिक, शावकों की मौत नर बाघ के हमले की वजह से हुई है. डॉग स्क्वॉड की मदद से छानबीन की गई और पोस्टमार्टम के बाद शवदाह/भस्मीकरण की कार्यवाही की गई.
आखिर क्यों लड़ते हैं बाघ?
ऐसा कहा जाता है कि बाघ अपनी टेरिटरी में किसी दूसरे नर बाघ को बर्दाश्त नहीं करता है. ऐसे में लोकल 18 ने कान्हा नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर पुनीत गोयल से बातचीत की. बातचीत में हमें तीन कारण समझ आए. उन्होंने बताया कि यह एक प्राकृतिक घटना है और हमें इसमें दखल नहीं देना चाहिए. उनका कहना है कि जिस बाघ की मौत हुई थी, उसकी उम्र काफी हो चुकी थी. जब एक ही क्षेत्र में दो नर बाघ रहते हैं, तब एक-दूसरे को चैलेंज करने की प्रवृत्ति होती है. ऐसे में दोनों में भिड़ंत होती है, तो वह अपने जींस को आगे बढ़ाता है.
तब शावकों को भी नहीं बख्शता बाघ
उन्होंने आगे बताया कि नर बाघ अगर बाघिन को देखता है और उससे हुए किसी और बाघ के बच्चे देखता है, तो बाघ का खून खौल जाता है. ऐसे में वह उन शावकों को भी नहीं बख्शता. दरअसल बाघों में एक व्यवहार होता है कि वे अपने खून यानी जींस को आसपास देखना पसंद करते हैं. कई बार बाघिन दूसरे बाघों से अपने बच्चों को बचाने में सफल रहती है लेकिन कान्हा में हुई घटना में बाघिन नाकाम रही.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.