MP की अनोखी परंपरा, जवारा विसर्जन में बच्चों से बूढे़ तक… शरीर में छिदवाते हैं नुकीले बाना, PHOTOS

MP की अनोखी परंपरा, जवारा विसर्जन में बच्चों से बूढे़ तक… शरीर में छिदवाते हैं नुकीले बाना, PHOTOS


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Jabalpur News: जबलपुर में अनोखा जवारा विसर्जन किया जाता है. इसमें जो भक्त शामिल होते हैं, उनके शरीर पर बाना चुभा होता है. इस हैरतअंगेज नजारे को देखने के लिए हजारों लोग जुटते हैं.

मध्य प्रदेश के संस्कारधानी जबलपुर में अनोखा जवारा विसर्जन किया जाता है, जहां हजारों की संख्या में भक्तों का जनसैलाब जवारा विसर्जन देखने के लिए उमड़ता है. खास बात ये कि इस विसर्जन में बच्चों से लेकर बूढ़े पूरे शरीर में नुकीले बाना छेदते हैं.

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दरअसल, हम बात कर रहे हैं जबलपुर के बूढी खेरमाई जवारा विसर्जन की जिसे बुंदेलखंड परंपरा के अनुसार विसर्जित किया जाता है. इस विसर्जन में सैकड़ों भक्त शरीर में नुकीले बाना छेदते हैं.

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यह बाना सिर्फ चेहरे में ही नहीं, बल्कि शरीर के कई अंगों में भक्तों द्वारा छेदा जाता है, जिसे देखकर सभी हैरान रह जाते हैं. हालांकि, भक्त इसे माता रानी की महिमा बताते हैं.

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जबलपुर शहर के चार खंबा स्थित धूमावती मंदिर को बूढ़ी खेरमाई मंदिर के नाम से जाना जाता है. इस मंदिर में करीब 1500 साल से भक्त आराधना की जा रही है, जहां मंदिर में बाना चढ़ाने की विशेष परंपरा है.

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ऐसा माना जाता है मन्नत पूरी होने पर भक्त मां के चरणों में बाना को अर्पित करते हैं. जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जवारा विसर्जन में शामिल होते हैं. जबलपुर के इस जवारा विसर्जन को देखने दूर-दराज से लोग आते हैं.

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जवारा विसर्जन में 500 से अधिक श्रद्धालु बाना छिदवाते हैं, जिसमें बड़े-बूढ़े से लेकर बच्चे शामिल होते हैं. जवारे के विसर्जन जुलूस को भारी पुलिस सुरक्षा बल के बीच निकाला जाता है. जहां चल समारोह मचरहाई होते हुए छोटा फुहारा होकर हनुमानताल पहुंचता है. जवारे को विसर्जित किया जाता है.

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भक्त आकाश बर्मन ने बताया कि कई वर्षों से जवारा विसर्जन में शामिल हो रहे हैं. भारत का यह अनोखा जवारा विसर्जन है, जो आस्था का प्रतीक है. बाना छिदवाने के दौरान किसी तरह का दर्द नहीं होता, बल्कि एक अनोखी शक्ति का एहसास होता है.

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MP की अनोखी परंपरा, बच्चों से बूढे़ तक…पूरे शरीर में छेदते हैं नुकीले बाना



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