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ऋषभ पंत मैनचेस्टर टेस्ट में टूटी टांग के बावजूद भी खेलते हुए दिखाई दिए थे. जिसके बाद रिप्लेसमेंट नियम को लेकर कई दिग्गजों ने सही पॉलिसी नहीं होने का मुद्दा उठाया था. अब बीसीसीआई रणजी ट्रॉफी टूर्नामेंट में इसे लेकर नया नियम लेकर आई है.
नई दिल्ली. अंग्रेजों की धरती पर मैनचेस्टर टेस्ट के दौरान सभी ने ऋषभ पंत को टूटी टांग से मैच खेलते हुए जरूर देखा होगा. अब इसे लेकर बीसीसीआई ने रणजी ट्रॉफी में पायलट प्रोजेक्ट के तहत एक नियम लागू किया है. रणजी ट्रॉफी का सीजन बुधवार से शुरू होने जा रहा है. इससे ठीक पहले बीसीसीआई ने इंजरी सब्सिट्यूट को अपडेट कर दिया है. राज्य संघों को दिए गए निर्देशों के अनुसार कोई भी खिलाड़ी गंभीर चोट के कारण प्लेयर बदलने की तारीख से एक सप्ताह तक मैदान पर दोबारा नहीं उतर पाएगा. ऐसा करने से पहले उसे बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस यानी सीओई से मंजूरी लेनी होगी.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार यह आईसीसी का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इसे लागू करने से पहले एक पायलट प्रोजेक्ट है. बीसीसीआई द्वारा राज्य संघों को जारी अधिसूचना में कहा गया है, “अगर मैच के दौरान किसी खिलाड़ी को गंभीर चोट लगने पर रिप्लेस किया जाता है तो संबंधित खिलाड़ी को गंभीर चोट के रिप्लेसमेंट की अनुमति मिलने की तारीख से कम से कम सात दिनों के लिए मैदान से बाहर रहना होगा. न्यूनतम स्टैंड डाउन दिनों की अवधि पूरी होने के बाद संबंधित खिलाड़ी को अपनी फिटनेस के आगे के आकलन के लिए बीसीसीआई-सीओई को रिपोर्ट करना होगा. बीसीसीआई सीओई का विशेषज्ञ पैनल उसकी फिटनेस का आकलन करेगा और विशेषज्ञ की रिपोर्ट के आधार पर खिलाड़ी को बीसीसीआई के मैचों में भविष्य में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी.”
आसान नहीं इससे बच निकलना
अपडेट किए गए नियम के अनुसार अगर कोई खिलाड़ी 15 से 18 अक्टूबर के बीच होने वाले रणजी ट्रॉफी मैच के पहले दिन चोटिल हो जाता है और दूसरे दिन यानी 16 अक्टूबर को चोट के रिप्लेसमेंट का अनुरोध और अनुमति मिलने से पहले शाम को स्कैन के लिए अस्पताल ले जाया जाता है. ऐसी स्थिति में 17 अक्टूबर न्यूनतम स्टैंड डाउन दिनों का पहला दिन होगा.
टूटी टांग से खेले थे पंत
इस बहस ने तब जोर पकड़ लिया जब ऋषभ पंत इस जुलाई में मैनचेस्टर टेस्ट में टूटे पैर के साथ बल्लेबाजी करने उतरे और उसके बाद क्रिस वोक्स ओवल में सीरीज के अंतिम टेस्ट की दूसरी पारी में गेंदबाजी करने में असमर्थ रहे. पूर्व क्रिकेटरों के एक वर्ग ने इस तरह के रिप्लेसमेंट की आवश्यकता को उठाया था.
पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें
पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और… और पढ़ें