Unbreakable Cricket Record: क्रिकेट की रिकॉर्डबुक में कई ऐसे रिकॉर्ड्स हैं जिनपर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है. हम आपको ऐसे असंभव रिकॉर्ड के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके आगे सचिन तेंदुलकर के 100 शतक और डॉन ब्रैडमैन का 99 का औसत भी छोटा नजर आता है. ये रिकॉर्ड 2 ओवर में 95 रन का महारिकॉर्ड है. इस रिकॉर्ड के चलते फरवरी 1990 में न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में वेलिंगटन और कैंटरबरी के बीच शेल ट्रॉफी का मुकाबला इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया.
आखिरी दिन दिखा रोमांच
शेल ट्रॉफी के लिहाज से यह मुकाबला वेलिंगटन के लिए करो या मरो के समान था. आखिरी दिन वेलिंगटन ने अपनी दूसरी पारी 291 के स्कोर पर घोषित की और कैंटबरी को 292 रन महज 59 ओवर में हासिल करना था. कैंटरबरी की शुरुआत खराब रही और उनके 8 विकेट 108 रन पर गिर चुके थे. वेलिंगटन आसानी से जीत की तरफ थी. लेकिन कैंटरबरी के विकेटकीपर ली जर्मन और रोजर फोर्ड ने मुकाबले का रुख ही बदल दिया.
ड्रॉ से बचने के लिए वेलिंगटन की बेहद खराब योजना
वेलिंगटन के कोच जॉन मॉरिसन और कप्तान एर्व मैकस्वीनी को ड्रॉ से बचने के लिए एक योजना बनाकर पैर पर कुल्हाड़ी मार ली. उन्होंने अपनी टीम के बल्लेबाज बर्ट वैंस को गेंद थमा दी. योजना थी कि वैंस ऐसे ओवर फेंकेंगे, जिसमें ढेर सारे रन बनें ताकि कैंटरबरी जीत के करीब पहुंचे और आखिरी दो विकेट गंवाने का जोखिम उठाए. कैंटबरी के पास 2 विकेट थे और टीम को 95 रन की दरकार थी. कैंटबरी के बल्लेबाज जर्मन 75 रन बनाकर खेल रहे थे. बर्ट वेंस ने जानबूझकर नो-बॉल फेंकना शुरू किया, उनके पहले 17 गेंदों में से सिर्फ एक गेंद वैध थी.
एक ओवर में आए 77 रन
जर्मन ने वैंस के इस ओवर का भरपूर फायदा उठाया. उन्होंने इस ओवर में 8 छक्के और 5 चौकों की बदौलत 70 रन ठोके. ओवर में कुल 77 रन आए क्योंकि फोर्ड ने भी दो गेंदों पर 5 रन जोड़े. एक ओवर में सबसे ज्यादा रन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड यहीं कायम हो चुका था. नो बॉल इतनी थीं कि स्कोरबोर्ड ऑपरेटर इस उलझन में पड़ गए कि इतने रन कैसे गिने जाएं. ईएसपीएन की रिपोर्ट के मुताबिक वे दर्शकों से भी मदद मांगने दिखे. अंपायर भी कंफ्यूज हो गए और उन्होंने ओवर को सिर्फ 5 वैध गेंदों के बाद खत्म कर दिया.
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आखिरी ओवर का थ्रिलर
आखिरी ओवर में कैंटरबरी को जीत के लिए 18 रन चाहिए थे लेकिन स्कोरबोर्ड सही नहीं चल रहा था, इसलिए किसी को सही स्थिति का पता नहीं था. जर्मन ने इस ओवर में 17 रन बनाए और स्कोर बराबर हो गया. लेकिन फोर्ड ने आखिरी गेंद को रक्षात्मक खेल लिया, क्योंकि उन्हें लगा कि अभी जीत दूर है. मैच खत्म होने के बाद जब हिसाब लगाया गया तो पता चला कि कैंटरबरी को सिर्फ 1 रन की जरूरत थी. इस मैच को ड्रॉ पर खत्म किया गया था.