क्या आप जानते हैं कि भारत में हर साल सड़क हादसों में मरने वालों में करीब 36% लोग पैदल यात्री होते हैं? जी हां और अब सवाल उठ रहा है कि कहीं हम पैदल गलत दिशा में तो नहीं चल रहे.मध्यप्रदेश के जबलपुर निवासी ज्ञान प्रकाश ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लगाई है, जिसमें कहा गया है कि भारत में पैदल यात्रियों को सड़क की “दाईं ओर” चलना चाहिए, ताकि वे सामने से आती गाड़ियों को देख सकें और खुद को सुरक्षित रख सकें.
उन्होंने बताया कि अमेरिका, फ्रांस, रूस, जर्मनी और चीन जैसे देशों में पैदल यात्री सड़क की दाईं ओर चलते हैं, यानी सामने से आती गाड़ियों की दिशा में. इससे न केवल वे वाहन को देख पाते हैं, बल्कि किसी आपात स्थिति में खुद को बचाने का मौका भी मिलता है.
पीठ करके चलना सबसे बड़ा खतरनाक
ज्ञान प्रकाश ने कहा कि बचपन से हमें सिखाया गया कि सड़क की बाईं तरफ चलो, लेकिन यह नियम पैदल चलने वालों के लिए नहीं है. पीछे से आती गाड़ियों की वजह से हादसे बढ़ रहे हैं. हमें अपने चेहरे की दिशा में आने वाली गाड़ियों को देखना चाहिए, ताकि सतर्क रह सकें.
उन्होंने बताया कि सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक टू-व्हीलर के बाद सबसे ज्यादा मौतें पैदल यात्रियों की होती हैं. जबलपुर शहर सड़क हादसों में पैदल यात्रियों की मौत के मामलों में राज्य में सबसे आगे है.
1984 से चला रहा हूं यह अभियान
ज्ञान प्रकाश कोई नए कार्यकर्ता नहीं हैं. वे पिछले 40 सालों से इस विषय पर जागरूकता अभियान चला रहे हैं. उन्होंने 1984 में “यातायात शिक्षा” नाम की एक किताब भी लिखी थी, जिसमें उन्होंने पैदल यात्रियों को सामने से आने वाले ट्रैफिक की ओर चलने की सलाह दी थी. उन्होंने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि सरकार पैदल चलने वालों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे और हाईवे सेफ्टी कोड तैयार करे, जिससे देश में सड़क दुर्घटनाएं कम की जा सकें.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और NHAI से मांगा जवाब
अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से जवाब मांगा है कि क्या भारत में भी विदेशों की तरह पैदल यात्रियों को सड़क की दाईं ओर चलने का नियम बनाया जा सकता है?