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Bhopal Picnic Spots: दिवाली पर इस बार भी लंबी छुट्टियों का दौर देखने को मिलेगा. ऐसे में राजधानी भोपाल के आसपास घूमने के लिए अलग-अलग पिकनिक स्पॉट का प्लान बनाया जा सकता है. यहां कम खर्चे में दोगुना मजा मिल जाएगा. जानें सब
भोपाल-विदिशा हाईवे पर शहर से करीब 43 किलोमीटर दूर रायसेन जिले में स्थित हलाली डैम फेमस पिकनिक स्पॉट में से एक है. बारिश और ठंड के सीजन में यहां सबसे ज्यादा पर्यटक पहुंचते हैं.

हलाली डैम के पास दिनभर पिकनिक मनाने के लिए वोटिंग से लेकर कई तरह के अन्य विकल्प मिल जाते हैं. साथ ही यहां एक छोटा पचमढ़ी नमक झरना भी मौजूद है. इस कहते रिक्त यहां मध्य प्रदेश पर्यटक विभाग का होटल भी है, जिसमें लाजवाब व्यंजन का स्वाद चख सकते हैं.

भोपाल-इंदौर हाईवे पर सीहोर जिले में स्थित शहर से करीब 42 किलोमीटर दूर श्री चिंतामन गणेश मंदिर दर्शन घूमने के लिए एक अच्छी जगह है. यहां भगवान गणेश के दर्शन के बाद मालवा के प्रसिद्ध दाल बाफले का स्वाद चखने के लिए बढ़िया ढाबे मौजूद है.

इसके अलावा सीहोर जिले में कई फिल्मों व वेब सीरीज की शूटिंग हो चुकी है, जहां आप बड़ी संख्या में पर्यटक शूटिंग लोकेशन पर पहुंच रहे हैं. इसमें पर्यटक चर्चित वेब सीरीज पंचायत की शूटिंग लोकेशन महोदिया गांव में सबसे ज्यादा पहुंच रहे हैं.

भोपाल-नर्मदापुरम हाईवे पर शहर से करीब 44 किलोमीटर दूर जिला भीमबेटका की गुफाएं देश की यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में से एक है. यहां 700 से अधिक शैलाश्रय मौजूद हैं, जो की 30,000 साल से भी पुरानी बताई जाती हैं.

यह चित्र शिकार, नृत्य, जानवर, और दैनिक जीवन जैसे दृश्यों को दर्शाते हैं. साथ ही ये गुफाएं भारतीय उपमहाद्वीप में मानव जीवन के सबसे पुराने निशानों में से हैं. दिवाली की छुट्टियों में घूमने के यह जगह भी एक अच्छा विकल्प हो सकती है.

भोपाल-सागर हाईवे पर शहर से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित उदयगिरि की गुफाएं हिंदू और जैन धर्म से संबंध रखती हैं. इसमें कई गुफाएं गुप्त काल की भी मानी जाती हैं. करीब 20 चट्टानों को काटकर इन गुफाओं का निर्माण किया गया था, जो की तीसरी से पांचवीं शताब्दी ईस्वी के दौरान निर्मित हुई.

उदयगिरि की गुफाओं में घूमने का प्लान अपने दोस्तों और परिवारों के साथ मनाया जा सकता है. इसके अतिरिक्त यहां से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर ही सांची स्तूप भी मौजूद है, जहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं.

भोपाल से औबेदुल्लागंज की ओर जाने वाली रास्ते पर शहर से करी 35 किलोमीटर दूर आशापुरी धाम मौजूद है. यहां कई टूटे हुए वह अधूरे मंदिर मौजूद है, जो की इतिहास के पन्नों में एक अलग पहचान रखते हैं.

आशापुरी एक आर्कियोलॉजिकल साइट है, जहां प्राचीन भारत की समृद्ध वास्तुकला और शिल्प कला का खजाना छिपा हुआ है. यहां के मंदिर देखने में खजुराहो की तरह ही नजर आते हैं.