भिंड के गोहद में 12 साल पुराने एक विवादित मामले में अदालत ने प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए एसडीएम कार्यालय की बोलेरो गाड़ी कुर्क करवाई है। यह कार्रवाई उस क्षतिपूर्ति राशि की वसूली के लिए की गई, जो अब तक शासन ने पीड़ित परिवार को नहीं दी थी
.
मामला वर्ष 2013 का है। तहसील कार्यालय के पीछे विहारी नगर स्थित मकान को प्रशासन ने अतिक्रमण बताकर तोड़ दिया था। मकान मालिक सरमनलाल ने इस कार्रवाई को अवैध बताते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
न्यायालय ने 21 दिसंबर 2017 को सरमनलाल के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मकान तोड़े जाने को गलत ठहराया और शासन को क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया। शासन ने इसके खिलाफ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय में अपील दायर की, लेकिन अपील भी खारिज कर दी गई।
फैसला अंतिम होने के बावजूद शासन ने क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान नहीं किया। इससे नाराज होकर सरमनलाल ने वर्ष 2022 में इजरा (वसूली प्रक्रिया) शुरू की।
इसके बाद न्यायालय ने 9 अक्टूबर 2025 को आदेश जारी करते हुए गोहद एसडीएम कार्यालय की बोलेरो (एमपी 02 एवी 6938) कुर्क करने के निर्देश दिए।वाहन की कीमत करीब 3.50 लाख रुपये आंकी गई है, जबकि कुल वसूली राशि 5 लाख 40 हजार रुपए है। शेष रकम वसूलने के लिए अब तहसीलदार के वाहन की कुर्की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
लंबे संघर्ष के दौरान मकान मालिक सरमनलाल का निधन हो गया, जिसके बाद उनकी पत्नी सरवती बाई ने यह कानूनी लड़ाई जारी रखी। शासन की ओर से कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार को पक्षकार बनाया गया था।
शासन पक्ष के अधिवक्ता केसी उपाध्याय ने अदालत से दो माह का समय मांगा है।वहीं, पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ह्रदेश शुक्ला ने कहा यह मामला इस बात का उदाहरण है कि न्याय भले देर से मिले, परंतु कानून अन्याय पर अवश्य विजय प्राप्त करता है।