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Diwali Diya Design: दीवाली मुख्य रूप से रौशनी का त्योहार है, इस दिन खासकर हर घर में दीये जलाए जाते हैं. कुछ लोग मिट्टी के दीये जलाते हैं तो कुछ इलेक्ट्रिक वाले.
दिवाली का त्यौहार रोशनी, खुशियों और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है. हर साल जब यह पर्व आता है, तो बाजारों में सजावट की चकाचौंध बढ़ जाती है. परंपरागत रूप से घरों को जगमगाने वाले मिट्टी के दीये अब फिर से फैशन में लौट आए हैं. इस बार दिवाली पर बाजारों में मिट्टी के डिजाइनर दीयों की खास धूम देखने को मिल रही है. ये दीये न केवल सुंदर हैं बल्कि चाइनीज इलेक्ट्रिक दियों को भी कड़ी टक्कर दे रहे हैं.
खंडवा के समाजसेवी लव जोशी बताते हैं कि इस बार स्थानीय कुम्हारों ने मिट्टी के दीयों को एक नया रूप दिया है. पहले जो साधारण दीये हुआ करते थे, अब वे डिजाइनर रूप में बदल गए हैं. इन दीयों पर सुंदर रंगोली पैटर्न, पारंपरिक आकृतियां, मोती, मिरर वर्क और चमकीले रंगों से सजावट की जा रही है. यह दीये बाजार में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं.
जोशी का कहना है कि इन डिजाइनर दीयों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये पूरी तरह देसी और पर्यावरण के अनुकूल हैं. इनमें बिजली की जरूरत नहीं होती, न ही यह प्लास्टिक या धातु से बने होते हैं. मिट्टी से बने ये दीये न केवल सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि कुम्हार समुदाय के लिए रोज़गार का बड़ा साधन भी बन रहे हैं. इससे गांव और छोटे शहरों में पारंपरिक कला को नया जीवन मिल रहा है.
इस बार बाजारों में कई नई वैरायटी भी देखने को मिल रही है जैसे कमल आकार के दीये, गणेश-लक्ष्मी आकृति वाले दीये, रंगीन झिलमिल डिजाइनर दीये, और तेल बचाने वाले लंबे समय तक जलने वाले दीये। इनकी कीमत भी आम लोगों की जेब के अनुसार रखी गई है. जहां इलेक्ट्रिक चाइनीज लाइट्स महंगी पड़ती हैं, वहीं मिट्टी के डिजाइनर दीये सस्ते और टिकाऊ विकल्प साबित हो रहे हैं.
कुम्हारों का कहना है कि इस बार की दिवाली उनके लिए उम्मीदों से भरी है. पिछले कुछ सालों में चाइनीज लाइट्स और प्लास्टिक उत्पादों ने उनकी बिक्री पर असर डाला था, लेकिन अब “वोकल फॉर लोकल” के अभियान से लोगों में देसी उत्पादों के प्रति झुकाव बढ़ा है. लोग फिर से पारंपरिक चीजों की ओर लौट रहे हैं.
स्थानीय बाजारों में इन दीयों की डिमांड इतनी बढ़ गई है कि कई कारीगरों को अतिरिक्त कामगार रखने पड़े हैं. कुछ महिला स्वयं सहायता समूह भी अब इन दीयों को सजाने और बेचने के काम में जुड़ गए हैं, जिससे महिलाओं को भी आर्थिक आत्मनिर्भरता का अवसर मिल रहा है.
इस दिवाली, जब हर घर में रोशनी फैलेगी, तो इन मिट्टी के डिजाइनर दीयों की चमक एक अलग ही संदेश देगी “देशी अपनाओ, पर्यावरण बचाओ.”देसी कला, संस्कृति और मेहनतकश कारीगरों की यह कोशिश न सिर्फ घरों को जगमगाएगी, बल्कि “मिट्टी की खुशबू” को भी हर दीप की लौ के साथ जिंदा रखेगी.
Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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