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Govardhan Puja 2025: गोवर्धन पूजा दीपावली के अगले दिन मनाई जाती है, जिसे अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है, लेकिन छतरपुर जिले में इस दिन चना दाल और चावल बनाना पारंपरिक है.
Govardhan Puja 2025. गोवर्धन पूजा का पर्व हर साल धूमधाम और भव्यता के साथ मनाया जाता है. यह दीपावली के दूसरे दिन मनाया जाता है, जिसे अन्नकूट पूजा भी कहते हैं. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को देवराज इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाया था.
पंडित नंद बाबू शुक्ला बताते हैं कि हमारे यहां गोवर्धन पूजा त्योहार में एक ख़ास तरह का भोजन बनाया जाता है जो एक खास दिन ही बनाया जाता है. दरअसल, छतरपुर जिले में दीवाली की रात चना दाल और चावल बनाना जरूरी होता है. भले ही आपके घर में कितने भी व्यंजन बन जाएं लेकिन चना की दाल और चावल बनाना जरूरी है. अगर इसे नहीं बनाते हैं तो गोवर्धन पूजा नहीं हो पाती है.
2 दिन पहले ही बनता है खास भोजन
पंडित बताते हैं कि दीपावली के दिन चना की दाल और चावल बनाने की परंपरा है. पीढ़ियों से यही भोजन बनाने की परंपरा है. भोजन बनाने के दौरान पहले से ही गोवर्धन पूजा में भगवान कृष्ण के लिए चना की दाल और चावल निकाल लिए जाते हैं. गोवर्धन पूजा के पहले तक इसे अलग रखा जाता है. इस भोजन को कोई छूता नहीं है. गोवर्धन पर्वत की पूजा के दौरान जब गोबर का पर्वत बनाया जाता है. तब इस पर्वत में चना दाल और चावल चढ़ाया जाता है.
गोबर से बनता है गोवर्धन
पंडित बताते हैं कि घर के आंगन या मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है. इसके मध्य में भगवान कृष्ण की प्रतिमा स्थापित करते हैं. इस दिन भी 56 भोग या अन्नकूट तैयार करते हैं और भगवान श्रीकृष्ण तथा गोवर्धन महाराज को अर्पित करते हैं. इसमें कढ़ी-चावल, बाजरा, और माखन-मिश्री जरूर शामिल होते हैं.
Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has worked a…और पढ़ें
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