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Inspirational Story: भोपाल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वंदना ने अपने NGO के जरिए 22 तलाकशुदा और विधवा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है. ये महिलाएं हैंडमेड साड़ियों, कुर्तियों और पर्स बनाकर नया जीवन जी रही हैं.
भोपाल. देशभर में इस डिजिटल दुनिया में अब महिलाएं भी किसी से पीछे नही हैं और हर हर जगह वो पुरुषों से कंधा मिलकर दुनिया में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन कई जगह आज भी महिलाएं और खासकर तलाकशुदा और विधवा महिलाएं जीवन में संघर्ष कर रही हैं. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में ऐसी ही अकेली महिलाओं के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वंदना ने वो कर दिखाया है, जिससे 22 महिलाओं को नया जीवन मिला है. जहां ये महिलाएं अपने हैंडमेड प्रोडक्ट से नाम कमा रही हैं, देखिए आखिर कैसे हुई थी इस महिला समूह की शुरुआत जो आज अकेली महिलाओं को जिंदगी में नया मौका को दे रहा है .
महिलाएं याद रखें, डर के आगे जीत है!
भोपाल के इन महिला समूह में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उनको ट्रेनिंग और रोजगार के अवसर दिए जाते हैं. जिससे वो अपनी पसंद का काम कर अपने पैरों पर खड़ी हो सकें. इस एनजीओ में डेढ़ साल से काम करने वाली वंदना विश्वकर्मा बताती हैं, ‘मैं इलाज के लिए डॉ. वंदना मैम के पास गई थी. जहां से मैं इस एनजीओ के साथ जुड़ी और मुझे सिलाई आती थी तो महिलाओं के लिए कुर्ती, साड़ी, दुपट्टा बनाने का काम संभाला है. महिलाओं को मैसेज देते हुए वो कहती हैं कि, डर से जिंदगी खत्म होती है. डर के आगे जीत है ये सच बात है.’
साड़ियों पर हस्तकला, मोतियों के पर्श बना सशक्त हुई महिलाएं
राजधानी भोपाल में डॉ. वंदना के महिला एनजीओ में विधवा और तलाकशुदा महिलाएं अहमदाबाद से आए मोतियों से सुंदर पर्स और इसके साथ ही घर सजाने की कई चीजें अपने घर में रहकर बनाती हैं. एनजीओ संचालिका डॉ. वंदना बताती हैं कि अब महिलाएं कहती हैं कि दीदी अब हमें घर चलाने में दिक्कत नहीं आती है. वो अपने बच्चों की फीस भर पाती हैं और अपने स्वाभिमान के साथ जिंदगी जी रही हैं.
Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें
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