हरदा में नहरें गंदी, सफाई नहीं हुई: 25 अक्टूबर से पानी छोड़ने की मांग, सिंचाई को लेकर किसान चिंतित – Harda News

हरदा में नहरें गंदी, सफाई नहीं हुई:  25 अक्टूबर से पानी छोड़ने की मांग, सिंचाई को लेकर किसान चिंतित – Harda News


हरदा में किसानों ने आगामी रबी सीजन की सिंचाई के लिए 25 अक्टूबर से तवा डैम से पानी छोड़ने की मांग की थी। यह मांग हाल ही में कलेक्ट्रेट सभागृह में हुई जल उपयोगिता समिति की बैठक में उठाई गई थी।

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हालांकि, अब तक नहरों में जमी झाड़ियां और कचरा साफ नहीं हो पाया है, जिससे नहरों की स्थिति बेहद खराब है। नहरों में कीचड़, गाद, लकटीली झाड़ियां और अन्य कचरा जमा है। पुलियों के नीचे शराब की बोतलें, कपड़े और अन्य अपशिष्ट पदार्थ फंसे हुए हैं। इस स्थिति के कारण किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचने में भारी परेशानी आएगी, खासकर टेल क्षेत्र के किसानों को समय पर पानी नहीं मिल पाएगा।

इस संबंध में जल संसाधन विभाग की कार्यपालन यंत्री सोनम बाजपेई ने बताया कि नहरों की सफाई का काम चल रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि डैम से पानी छोड़े जाने से पहले सभी शाखाओं में सफाई का काम पूरा कराकर किसानों को समय पर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा।

हालांकि, जिले की सोनतलाई उप शाखा की 2 आर और रेवापुर माइनर में अभी तक कई स्थानों पर सफाई का काम शुरू नहीं हो पाया है। ग्राम खामापड़मा के किसान संदीप डाले ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस वर्ष खरीफ सीजन की सोयाबीन की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। किसानों को अब रबी सीजन की गेहूं और चना की फसलों से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। संदीप डाले ने जोर देकर कहा कि यदि समय पर नहरों की सफाई नहीं हुई तो टेल क्षेत्र के किसानों को पानी नहीं मिल पाएगा। उन्होंने विभाग से समय पर सफाई कार्य पूरा कराने की मांग की है।

गौरतलब है कि पहले जल उपयोगिता संस्थाओं के माध्यम से नहरों की सफाई की जाती थी, लेकिन अब यह कार्य विभाग स्वयं कर रहा है। विभाग ने इस वर्ष जिले के कुल सिंचाई योग्य रकबे में से एक लाख चार हजार 843 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसमें हरदा संभाग के लिए 52 हजार 302 हेक्टेयर और टिमरनी संभाग के लिए 52 हजार 541 हेक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य शामिल है। माइनर नहरों की बगैर सफाई किए ही डेम का पानी छोड़ दिए जाने से नहरें फूटने लगती हैं, जिससे पानी सीधा खेतों में समा जाता है और किसानों को नुकसान होता है।

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