सांप की आत्मा बताने आती है…उसने क्यों काटा था! साल में एक बार लगती है ये अदालत, हनुमानजी होते हैं जज!

सांप की आत्मा बताने आती है…उसने क्यों काटा था! साल में एक बार लगती है ये अदालत, हनुमानजी होते हैं जज!


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Ajab Gajab News: सीहोर में दिवाली के दूसरे दिन हर साल एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है, जिसे देख कोई भी हैरत में पड़ जाए. इसे नागराज की अदालत कहते हैं. इस अदालत में हनुमानजी न्यायाधीश होते हैं और सांपों की आत्मा की पेशी लगती है. वे बताते हैं कि उन्होंने क्यों डसा!

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के लसूडिया परिहार गांव में दीपावली के दूसरे दिन नागराज की अदालत लगाई जाती है. यह परंपरा करीब 100 वर्षों से चली आ रही है. इस परंपरा में सर्पदंश (सांप के काटने) से पीड़ित लोग अपने डसने का कारण जानने आते हैं. ग्रामीणों की मान्यता है कि नागदेवता पीड़ित के शरीर में प्रवेश कर बताते हैं कि उन्होंने क्यों काटा.

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खास बात ये कि इस अदालत में हनुमान जी को न्यायाधीश मानकर सांपों की आत्माएं पेशी पर आती हैं. कहते हैं कि पेशी शुरू होते ही ढोलक, मंजीरा और मटकी की लय पर जब विशेष मंत्र गाए जाते हैं, तब पीड़ितों में से कुछ लोगों के शरीर में नागदेवता की आत्मा प्रवेश कर जाती है. पीड़ित सांप की तरह डोलने लगता है.

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पीड़ित व्यक्ति की आवाज धीरे-धीरे बदलने लगती है. फिर वह बताते हैं कि किसी का घर तोड़ा गया, किसी को कुचल दिया गया या बिना कारण मारा गया. नागदेवता स्वयं बताते हैं, “मैं वही सांप हूं जिसने इसे काटा था. हनुमान जी के सामने वह अपनी गलती स्वीकार करता है और वचन देता है कि अब दोबारा किसी को नुकसान नहीं पहुंचेगा.

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गांव के गन्नू महराज त्यागी के अनुसार, उनका परिवार इस परंपरा को पीढ़ियों से निभा रहा है. यह परिवार वर्षभर सर्पदंश का इलाज करता है, लेकिन दीपावली के दूसरे दिन विशेष मंत्रों, हवन और पूजा विधि से ‘नागराज की अदालत’ का आयोजन करता है.

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इस दिन मंदिर में ‘कंडी’ नामक पारंपरिक वाद्य बजाए जाते हैं. इसकी धुन पूरे परिसर में गूंजती है. कहा जाता है कि इसी धुन के बीच सांप की आत्मा प्रकट होती है. जैसे ही धुन तेज होती है, पीड़ित व्यक्ति के हाव-भाव बदल जाते हैं. जैसे मानो कोई अलौकिक शक्ति प्रकट हो गई हो.

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ग्रामीणों के अनुसार, इस परंपरा की शुरुआत संत मंगलदास महाराज ने की थी, जो चिन्नोटा से यहां आए थे. उन्होंने ही लोगों को ‘गुरु मंत्र’ देकर नागों की पेशी की साधना प्रारंभ की थी. आज भी मंदिर में उनकी समाधि मौजूद है और श्रद्धालु मानते हैं कि उन्हीं की कृपा से यह अनुष्ठान सफल होता है.

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बताते है कि, कई बार पहले इलाज हो चुके लोग भी इस दिन फिर से पेशी में आते हैं. उनके शरीर और आवाज़ में सांप की आत्मा उतरती है. कुछ लोग हड़बड़ाते हैं, तो कुछ श्रद्धा भाव से हाथ जोड़कर देखते हैं. बरहाल, नागराज की अदालत आज भी लसूडिया परिहार गांव की खास पहचान है.

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