Khandwa News: आज भाईदूज है. आज बहनें भाइयों को तिलक कर उनके मंगल भविष्य की कामना करेंगी. लेकिन, खंडवा में एक ऐसी बहन भी हैं, जिसने एक मां की तरह अपने भाई को सफलता की मंजिल तक पहुंचाया. अंतिम बाला पटेल ने अपने छोटे भाई प्रफुल पटेल के लिए खूब संघर्ष किया. कहानी की शुरुआत साल 2003 से होती है. जब प्रफुल का जन्म हुआ. जन्म के कुछ ही महीनों बाद मां का साया उठ गया. छोटे से बच्चे के लिए यह सबसे बड़ी त्रासदी थी. पिता ने पूरी कोशिश की कि परिवार को संभाल सकें, लेकिन मां का प्यार कौन दे सकता था?
टिफिन सेंटर चलाकर भाई को पढ़ाया
उन्होंने अपने घर में ही टिफिन सेंटर शुरू किया. सुबह से शाम तक रसोई में मेहनत करना, खाना बनाना और लोगों तक टिफिन पहुंचाना. यही उनकी दिनचर्या बन गई. लेकिन, उन्होंने कभी थकान को खुद पर हावी नहीं होने दिया. उनका मानना था, “मेरी मेहनत से अगर मेरे भाई की जिंदगी बन सकती है, तो यही मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी है.” साल 2017 में प्रफुल आगे की पढ़ाई के लिए खंडवा आ गए. उस समय अंतिम का टिफिन सेंटर उनके लिए सबसे बड़ा सहारा बना. उन्होंने न सिर्फ आर्थिक रूप से, बल्कि मानसिक रूप से भी भाई को मजबूत बनाया. प्रफुल बताते हैं कि बहन ने कभी उन्हें मां की कमी महसूस नहीं होने दी. उन्होंने हर बार यह एहसास कराया कि रिश्ते जन्म से नहीं, भावना से बनते हैं.
भाई बन गया अफसर
कड़ी मेहनत और बहन के आशीर्वाद से प्रफुल ने परीक्षा पास की और आज वह कसरावद में एग्रीकल्चर डेवलपमेंट ऑफिसर (ADO) के पद पर कार्यरत हैं. यह सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि अंतिम की भी जीत है, एक ऐसी बहन की जीत, जिसने अपने हाथों की मेहनत से भाई को अफसर बनाया. अंतिम कहती हैं, “प्रफुल की सफलता उसकी मेहनत का नतीजा है, मैंने तो बस उसे रास्ता दिखाया. जब तक वह अपनी मंजिल तक नहीं पहुंचा, तब तक मैंने चैन की सांस नहीं ली.”
अब टिफिन सेंटर भी फेसम
भाईदूज का त्योहार इस भाई-बहन की जोड़ी के लिए बेहद खास होता है. हर साल प्रफुल अपनी बहन के पास खंडवा आते हैं. तिलक लगवाने के बाद दोनों एक-दूसरे को मिठाई खिलाते हैं, लेकिन उनके चेहरे की मुस्कान सिर्फ एक रस्म की नहीं, बल्कि उस भावनात्मक सफर की झलक होती है, जो उन्होंने साथ तय किया. आज अंतिम का टिफिन सेंटर शहर में मशहूर है. कई महिलाएं उनसे प्रेरणा लेकर अपने छोटे-छोटे बिजनेस शुरू कर चुकी हैं. वे कहती हैं, “अगर औरत ठान ले, तो वह किसी भी मुश्किल को जीत सकती है. मैं बस यह चाहती हूं कि हर बहन अपने भाई के सपनों को उड़ान दे सके.”