आजादी से अब तक MP के इस शहर में कितना आया बदलाव… क्या है इसकी खासियत? जानिए

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Rewa Cultural And Historical Significance: आज हम आपको एक ऐसे शहर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो भारत के आजाद होने से पहले ही आजादी की घोषणा कर चुका था और आज भी इस शहर में महाराज की प्रथा कायम है. हम बात कर रहे हैं रीवा शहर के बारे में, जिसे रियासतों की नगरी भी कहा जाता है. आइए जान लेते हैं इससे जुड़ी ज्यादा जानकारी.

Rewa Cultural And Historical Significance: आज हम आपको एक ऐसे शहर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो भारत के आजाद होने से पहले ही आजादी की घोषणा कर चुका था और आज भी इस शहर में महाराज की प्रथा कायम है. इस शहर का नाम रीवा है. इसे रियासतों की नगरी भी कहा जाता है. मध्य प्रदेश में स्थित यह शहर काफी प्राचीन है. हालांकि आजाद भारत में रियासतों का कोई वजूद नहीं है.

वैसे भारत के कई शहरों में यह प्रथा आज भी लागू है, लेकिन रीवा में महाराज का एक अलग ही जज्बा दिखता है. रीवा के वर्तमान महाराजा पुष्पराज सिंह की बेटी मोहिना सिंह को राजकुमारी से संबोधित किया जाता है. रीवा के स्थानीय लोग इसे काफी सम्मान की दृष्टि से देखते हैं.

इतिहासकार के मुताबिक 1617 ई. में महाराजा विक्रमादित्य सिंह ने रीवा को अपने राज्य की राजधानी बनाई थी. वर्तमान में रीवा का राजमहल विश्व विख्यात है. देश-विदेश के पर्यटक आज भी बड़े शौक से इस किले को देखने जाते हैं. लेकिन जब रीवा को राजधानी बनाई गई थी, तब महल अधूरा था. लेकिन विक्रमादित्य सिंह ने उसे पूरा करने का विचार किया.

आजादी के समय रीवा रियासत एक बड़ी और शक्तिशाली रियासत थी, जो बघेलखंड क्षेत्र में स्थित थी और मध्य भारत की सबसे बड़ी रियासतों में से एक थी. इस रियासत की आर्थिक स्थिति मजबूत थी और यह कला, संगीत और शिक्षा को बढ़ावा देती थी. आजादी के समय, रियासत में भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की भावनाएं मजबूत थीं और यहां के कई क्रांतिकारियों ने संघर्ष किया है.

आजादी के आंदोलन में भूमिका
इलाहाबाद के करीब होने के कारण, यहां स्वतंत्रता संग्राम के बारे में सूचनाएं लगातार मिलती रहती थीं. 1920 के दशक की शुरुआत से, यहां के लोग स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ना शुरू कर चुके थे. रीवा के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के अत्याचार का कड़ा विरोध किया, जिसमें ठाकुर रणमत सिंह और अन्य क्रांतिकारी शामिल थे. राजा रघुराज सिंह ने गुप्त रूप से क्रांतिकारियों की मदद की थी.

सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व
रीवा का दशहरा उत्सव मैसूर के बाद सबसे प्रमुख उत्सव माना जाता था. महाराजा वेंकट रमण सिंह ने 1895-96 में पड़े अकाल के दौरान प्रजा को राहत देने के लिए एक महल का निर्माण करवाया था. पंडित राम भरोसे अवस्थी के मार्टलैंड प्रेस ने 1927 में भारत के पहले राष्ट्रगान “वंदे मातरम” के प्रकाशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. 1912 में, महाराजा वेंकट रमण ने बघेला म्यूजियम की स्थापना करवाई, जहां रियासत की ऐतिहासिक धरोहरें आज भी सहेजी हुई हैं.

Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें

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