खरगोन. त्योहारों का मौसम खत्म होते ही अब किसान दोबारा खेतों की ओर लौटने लगे हैं. मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में इस समय रबी सीजन की तैयारी जोरों पर है. इस मौसम में यहां के किसान मुख्य रूप से गेहूं, चना और मक्का की खेती करते हैं लेकिन कई बार किसानों को अपनी मेहनत के बावजूद उम्मीद के अनुसार उत्पादन नहीं मिल पाता. इसका एक बड़ा कारण होता है, फसलों में गलत समय पर सिंचाई करना या पानी की कमी का सही प्रबंधन न कर पाना. इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए कृषि वैज्ञानिक डॉ आरके सिंह ने किसानों को ऐसी तकनीक बताई है, जिससे कम पानी में भी खेत लहलहाएंगे और अच्छी पैदावार मिल सकेगी. उन्होंने कहा कि आज के समय में जब जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है, ऐसे में किसानों को कम पानी में अधिक उत्पादन वाली तकनीक अपनानी चाहिए.
पहली सिंचाई बुआई के 21 दिन बाद
कृषि वैज्ञानिक के अनुसार, गेहूं की फसल की क्रांतिक अवस्था बुआई के 21 दिन बाद शुरू होती है. यही वह समय होता है, जब पौधों को नमी की जरूरत सबसे ज्यादा होती है. ऐसे में जिन किसानों के पास केवल दो बार सिंचाई का पानी उपलब्ध है, उन्हें पहली सिंचाई बुआई के 21 से 25 दिन के बीच करनी चाहिए और दूसरी सिंचाई 35 से 40 दिन के बीच करनी चाहिए. इस तरीके से कम पानी में भी फसल की बढ़वार अच्छी होती है और उत्पादन में कमी नहीं आती.
अगर किसानों के पास सिंचाई की उचित सुविधा उपलब्ध है, तो उन्हें वैज्ञानिक पैटर्न के अनुसार सिंचाई करनी चाहिए. जो की इस प्रकार है;
पहली सिंचाई: बुआई के 21 से 25 दिन बाद
दूसरी सिंचाई: 35 से 40 दिन बाद
तीसरी सिंचाई: 50 से 55 दिन बाद
चौथी सिंचाई: 65 से 70 दिन बाद
पांचवीं सिंचाई: 85 से 90 दिन बाद
इस तरीके से गेहूं की जड़ों को समय-समय पर नमी मिलती रहती है और फसल का दाना भरपूर और चमकदार बनता है.
कम पानी में भी बंपर उत्पादन कैसे लें?
कृषि वैज्ञानिक का कहना है कि सिंचाई केवल पानी देने की प्रक्रिया नहीं है बल्कि यह फसल के पोषण चक्र का अहम हिस्सा है. अगर किसान यह ध्यान रखें कि पानी जड़ों तक पहुंचे और खेत में जल जमाव न हो, तो नमी लंबे समय तक बनी रहती है. इसके लिए किसान मेड़बंदी, मल्चिंग और नालियों की सफाई जैसे छोटे उपाय अपनाएं.