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Celosia Plant: बुंदेलखंड में सेलोसिया के नाम का पौधा पाया जाता है जो अक्सर खरपतवार वाली जगह में दिखाई देता है. लेकिन बड़े-बड़े शहरों में इस पौधे की अच्छी डिमांड रहती है क्योंकि इससे निकलने वाला फूल एक विशिष्ट प्रकार का होता है. जिसकी वजह से इसको मुर्गा फूल या मुर्गे की कलगी बाला फूल भी कहते हैं.
सेलोसिया के पुष्प 4- 5 रंग की प्रजाति के पाए जाते हैं, भारत में इनका प्रयोग बागानी के पौधों के रूप में किया जाता है. ये यहां पर बोये भी जाते हैं. यह कई तरह की बीमारियों में भी उपयोग किए जाते हैं जिसके बीज, पत्तियां और तना का उपयोग किया जाता है.

इस पौधे को मुर्गा फूल इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका ऊपरी भाग मखमली होता है तो उसके नीचे का भाग मुर्गा की कलगी के जैसा होता है. इसलिए मुर्गा फूल के नाम से जाना जाता है.

मुर्गा फूल के पौधे की ऊंचाई तीन चार फीट तक हो जाती है. इसमें कई सारी शाखाएं निकलती हैं और जब इनमें फूल खिलते हैं तो यह पेड़ दूर से ही दमकने लगता है. गुलाबी मखमली और साइज में काफी बड़ा यह फूल होता है.

इस पौधे की एक और खासियत होती है जब यह छोटा होता है तो इसके पौधे में आने वाले पत्ते हल्के लाल रंग के होते हैं लेकिन जैसे-जैसे यह बढ़ता जाता है तो उतना ही इसके पत्ते हरे हो जाते हैं और जब यह अपनी पुरी साइज पर पहुंच जाता है तो फूल गुलाबी और पत्ते हरे हो जाते हैं.

इस फूल के पौधे को अक्सर बड़े-बड़े होटल और गार्डन में देखा जाता है लेकिन बुंदेलखंड में यह खरपतवार जैसी जगह पर पाया जाता है और लोग वहां से निकाल कर अपने घरों में ले आते हैं और गमले में लगा लेते हैं.

बड़े चमकदार और खूबसूरत फूल निकलने की वजह से यह घर की एंट्री को भी बेहद स्टाइलिश बना देते हैं, शहरों में महंगे दामों में खरीद कर लोग अपने घर या गार्डन के लिए ले जाते हैं.

वैसे तो इसका उपयोग गर्मियों के दिनों में अच्छा माना जाता है, लेकिन जब कोई डिप्रेशन में होता है तो इनकी पत्तियां का इस्तेमाल लोग खाने में करते हैं. यह इंसानों को डिप्रेशन से निकलने में मदद करता है और दिमाग को शांत बनाता है.

इस फूल की एक खास बात और है कि अगर आपने एक बार अपने गार्डेन में लगा दिया तो ये आपके गार्डेन से कभी नहीं जायेंगे. इसके बीज हवा से उड़ कर अपने सभी गमलों में उग जाएंगे. इसे किसी खास केयर की भी जरूरत नहीं होती है.