भोपाल. मध्यप्रदेश की 21वीं पशुगणना के नतीजे कई दिलचस्प आंकड़े लेकर आए हैं. राज्य में कुल 3 करोड़ 75 लाख 92 हजार 771 पशुधन दर्ज हुए. धार जिला सबसे ज्यादा गोवंश और बकरियों के साथ शीर्ष पर रहा, जबकि मुरैना भैंसपालन में नंबर वन बना. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन में गधों से ज्यादा घोड़े दर्ज हुए-गधे 51 और घोड़े 618. नर्मदापुरम में सबसे अधिक 335 गधे पाए गए, जबकि नौ जिलों में एक भी गधा नहीं मिला. राज्य सरकार की नीतियों के तहत बनने वाली गौशालाओं को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले समय में मध्य प्रदेश में गोवंश की संख्या में तेजी से इजाफा होगा.
धार बना ‘गोवंश राजधानी’
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के गृह जिले धार ने गोवंश और बकरी पालन में बाजी मारी है. यहां 6,52,253 गोवंश और 7,29,356 बकरियां दर्ज हुईं. यह संख्या पूरे राज्य में सबसे अधिक है. भेड़ों की बात करें तो शिवपुरी 53,962 भेड़ों के साथ शीर्ष पर है.
मुरैना में भैंसों का साम्राज्य
पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल और पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के क्षेत्र मुरैना में भैंसवंश की संख्या सबसे अधिक रही. यहां 6,86,079 भैंस दर्ज हुईं. मुरैना लंबे समय से डेयरी उत्पादन के लिए भी प्रसिद्ध रहा है.
उज्जैन में गधों से ज्यादा घोड़े
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन में पशुगणना का नतीजा सबसे दिलचस्प रहा. यहां गधों की संख्या मात्र 51 और घोड़ों की संख्या 618 रही. वहीं नर्मदापुरम जिला 335 गधों के साथ पहले स्थान पर रहा. सिवनी, हरदा, दमोह, बालाघाट, डिंडोरी, मंडला, निवाड़ी, अनूपपुर और पांढुर्णा जैसे नौ जिलों में एक भी गधा नहीं मिला.
छतरपुर में सूअरों और खच्चरों का बोलबाला
बागेश्वर धाम के लिए चर्चित छतरपुर जिले में सूअर और खच्चरों की संख्या सबसे अधिक दर्ज हुई. यहां 9,113 सूअर और 409 खच्चर पाए गए. वहीं ऊँटों के मामले में नीमच (332 ऊँट) सबसे आगे रहा.