OPINION: लीजेंड बनने की दहलीज़ पर प्रतीका रावल, अब नज़रें ऑस्ट्रेलिया पर

OPINION: लीजेंड बनने की दहलीज़ पर प्रतीका रावल, अब नज़रें ऑस्ट्रेलिया पर


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प्रतिका रावल ने न्यूजीलैंड के खिलाफ  ऐसा छक्का जड़ा जिसने उनके आलोचकों को मानो मैदान से बाहर फेंक दिया. अब वर्ल्ड कप में उनके कुल 308 रन हैं स्मृति मंधाना के बाद दूसरे स्थान पर और ऑस्ट्रेलिया की एलीसा हीली से आगे. यह आँकड़े ही बता रहे हैं कि प्रतीका ने अपनी बात बल्ले से कह दी है.

प्रतिका रावल के पास महिला क्रिकेट में लीजेंड बनने का मौका

नई दिल्ली.  पिछले हफ्ते तक प्रतीका रावल सोशल मीडिया पर आलोचनाओं और ट्रोलिंग का केंद्र बनी हुई थीं. लेकिन न्यूज़ीलैंड के खिलाफ़ उनके शानदार शतक ने सब कुछ बदल दिया. हर चौके-छक्के के साथ उन्होंने उन सभी आलोचकों को करारा जवाब दिया जिन्होंने उनकी क्षमता पर सवाल उठाए थे. बेवजह की आलोचनाओं और अपशब्दों ने उनके मानसिक संतुलन पर असर डाला था और इंग्लैंड के खिलाफ़ वह दबाव में दिखीं  कुछ ज़्यादा साबित करने की कोशिश करती हुईं.

ऐसे में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ़ का मुकाबला प्रतिका के करियर का निर्णायक मोड़ बन गया. असफलता का मतलब था और अधिक ट्रोलिंग, और सफलता का अर्थ सम्मान की वापसी. शुरुआत में प्रतीका सतर्क थीं  18 गेंदों पर 6 रन जबकि स्मृति मंधाना भी धीमी शुरुआत कर रही थीं. लेकिन जैसे-जैसे गेंद पुरानी होती गई, प्रतीका ने अपनी लय पकड़ ली। हर दिशा में शॉट्स, आत्मविश्वास से भरा बल्लेबाज़ी प्रदर्शन मानो वह विरोधी टीम से नहीं, बल्कि अपने आलोचकों से जंग लड़ रही हों स्ट्राइक रेट स्थिर रहा, पारी में कोई ढिलाई नहीं. स्मृति के आउट होने के बाद भी उन्होंने पारी को संभाला और गति बनाए रखी.

बैट से लिखी दास्तान 

आउट होने से ठीक पहले प्रतिका रावल ने न्यूजीलैंड के खिलाफ  ऐसा छक्का जड़ा जिसने उनके आलोचकों को मानो मैदान से बाहर फेंक दिया. अब वर्ल्ड कप में उनके कुल 308 रन हैं स्मृति मंधाना के बाद दूसरे स्थान पर और ऑस्ट्रेलिया की एलीसा हीली से आगे. यह आँकड़े ही बता रहे हैं कि प्रतीका ने अपनी बात बल्ले से कह दी है. जब वह आउट होकर पवेलियन लौटीं, उनके चेहरे पर राहत और गर्व साफ़ झलक रहा था. कोच अमोल मजूमदार दरवाज़े पर खड़े थे, चेहरे पर मुस्कान और स्वागत में उठे हाथ.  दोनों के बीच हाई-फाइव हुआ मानो कह रहे हों, “जवाब दे दिया”

अब ऑस्ट्रेलिया की बारी 

असली परीक्षा अब है, सेमीफ़ाइनल में भारत का सामना होगा मज़बूत ऑस्ट्रेलिया से  वही टीम जिसने सालों से विश्व क्रिकेट पर राज किया है. ग्रुप मैच में स्मृति और प्रतीका ने बेहतरीन शुरुआत दी थी, पर टीम उस लय को बनाए नहीं रख सकी पर इस बार दांव कहीं ज़्यादा ऊँचा है. स्मृति मंधाना इस वर्ल्ड कप की सबसे चमकदार बल्लेबाज़ रही हैं, लेकिन भारत को जीत दिलाने के लिए प्रतीका को भी एक और विशेष पारी खेलनी होगी.  यही वो मैच है जो नायकों को दंतकथा में बदल देता है और महिला क्रिकेट के लिए एक नया अध्याय लिख सकता है.

लीजेंड  बनने का मौका 

नॉकआउट मैचों में कुछ भी संभव है जैसा कि 2017 के डर्बी सेमीफ़ाइनल में हरमनप्रीत कौर ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ दिखाया था. अगर स्मृति और प्रतीका फिर वही करिश्मा दोहराती हैं, तो भारत इतिहास रच सकता है.  टीम को विश्वास रखना होगा और प्रतीका को भी. क्योंकि यही वो पल हैं जो लीजेंड गढ़ते हैंऔर अगर ऑस्ट्रेलिया को भी भारत के रास्ते में झुकना पड़ा  तो प्रतीका रावल का नाम भारतीय क्रिकेट के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो जाएगा.

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