भिंड-कटनी पेशाब कांड में पुलिस कार्रवाई पर सवाल: भिंड पुलिस युवक से बोली- रिपोर्ट में पेशाब पिलाई मत लिखवाओ; कटनी में अबतक आरोपी गिरफ्तार नहीं – Madhya Pradesh News

भिंड-कटनी पेशाब कांड में पुलिस कार्रवाई पर सवाल:  भिंड पुलिस युवक से बोली- रिपोर्ट में पेशाब पिलाई मत लिखवाओ; कटनी में अबतक आरोपी गिरफ्तार नहीं – Madhya Pradesh News


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ये कहना है भिंड जिले के एक गांव के रहने वाले दलित युवक धनसिंह( बदला नाम) का। धनसिंह ने इसी महीने की 20 तारीख को गांव के दबंगों पर मारपीट करने और पेशाब पिलाने की शिकायत दर्ज की है। धनसिंह का कहना है कि पुलिस ने रिपोर्ट तो लिखी, मगर वो मामले को दबाने की पूरी कोशिश कर रही थी।

इसी तरह पेशाब पिलाने की एक और घटना कटनी जिले के स्लीमनाबाद थाना क्षेत्र में हुई। यहां सरकारी जमीन पर अवैध खनन की शिकायत करने वाले दलित युवक ने दंबगों पर मारपीट और मुंह पर पेशाब करने का आरोप लगाया है।

इस मामले में भी पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगे हैं। भिंड जिले के एसपी का कहना है कि किसी तरह की कोई लापरवाही नहीं हुई है। वहीं कटनी एसपी ने देरी से मामला दर्ज करने के आरोप में जांच बैठा दी है।

बता दें कि एक के बाद एक सामने आई इन घटनाओं से सियासी बवाल भी मचा है। भीम आर्मी और कांग्रेस ने कानून व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं तो भिंड की घटना को लेकर सवर्ण समाज ने महापंचायत में जाटव समुदाय के बॉयकाट का ऐलान किया है।

भास्कर ने इस दोनों ही घटनाओं के पीड़ितों से बात कर समझा कि आखिर पुलिस ने किस तरह से लापरवाही बरती? इन आरोपों को दूसरे पक्ष और पुलिस का क्या कहना है। पढ़िए रिपोर्ट…

पीड़ित ने कहा- गाड़ी चलाने को लेकर हुआ विवाद धनसिंह (बदला नाम) ने बताया कि ‘घटना से दो-तीन दिन पहले, मेरे गांव के पास के रहने वाले सोनू बरुआ का फोन आया था। वह चाहता था कि मैं उसकी गाड़ी चलाऊं। जब मैंने मना कर दिया, तो वह फोन पर ही गाली-गलौच करने लगा। गुस्से में मैंने भी उसे जवाब दे दिया। इसके बाद वह मेरे गांव पहुंचा और मेरे पिता को धमकाया।

मैंने इसे बहुत गंभीरता से नहीं लिया, क्योंकि सोनू से मेरी कोई खास जान-पहचान नहीं थी, बस कभी-कभार दुआ-सलाम हो जाती थी। 20 अक्टूबर को मैं ग्वालियर में अपने किराए के मकान में सो रहा था। सुबह-सुबह सोनू बरुआ, आलोक और छोटू मेरे कमरे में घुस आए। उन्होंने मुझे घसीटते और मारते हुए नीचे उतारा।

गाड़ी में बैठाने से ठीक पहले, एक ने मेरी पीठ पर बंदूक का बट जोर से मारा। फिर मुझे बोलेरो में डालकर वे कहीं ले जाने लगे। गाड़ी के शीशे बंद थे और वे लगातार मुझे गालियां देते हुए पीट रहे थे।’

ये 20 अक्टूबर का सीसीटीवी फुटेज हैं, जिसमें आरोपी पीड़ित युवक को घर से बाहर निकाल रहे हैं।

ये 20 अक्टूबर का सीसीटीवी फुटेज हैं, जिसमें आरोपी पीड़ित युवक को घर से बाहर निकाल रहे हैं।

पानी की बोतल में पेशाब भरकर लाए थे- पीड़ित धनसिंह ने आगे बताया कि ‘सेमरपुरा के पास उन्होंने गाड़ी रोकी। सोनू बरुआ ने मेरे हाथ पकड़े, छोटू ने मेरा मुंह जकड़ लिया और आलोक एक पानी की बोतल में भरी पेशाब मुझे जबरदस्ती पिलाने लगा। मैं छटपटाता रहा, लेकिन उनकी पकड़ से खुद को छुड़ा नहीं पाया।’

बात यहीं खत्म नहीं हुई ये लोग मुझे गांव से लगभग 500 मीटर दूर सोनू के कुएं पर ले गए। वहां उन्होंने मुझे लोहे की जंजीर से बांध दिया और प्लास्टिक के पाइप से बेरहमी से पीटने लगे। वे जातिगत गालियां दे रहे थे और कह रहे थे कि ‘तुझ पर गाड़ी चढ़ाकर मार डालेंगे।

पुलिस वाले अलग कमरे में ले गए, दबाव बनाने लगे धनसिंह का आरोप है कि पुलिस ने भी रिपोर्ट दर्ज न कराने का दबाव बनाया था। धनसिंह के मुताबिक जब भीम आर्मी के लोग आए, तो आरोपी मुझे छोड़कर भाग गए थे। थोड़ी देर में पुलिस भी आ गई। हम शाम सात बजे के करीब थाने पहुंचे।

मैंने पुलिस को बताया कि इन लोगों ने मेरे 6,000 रुपए और बंदूक भी छीन ली है, जो अभी इन्हीं के पास है। पुलिस वाले मुझे एक अलग कमरे में ले गए और मुझ पर दबाव बनाने लगे कि मैं पैसे, बंदूक और पेशाब वाली बात अपनी शिकायत में न लिखवाऊं।

वे करीब एक घंटे तक मुझे समझाते रहे। मेरे शरीर में असहनीय दर्द हो रहा था और मुझे तुरंत अस्पताल की जरूरत थी, लेकिन उन्होंने रात 11 बजे मेरी एफआईआर लिखी। उस एफआईआर में न तो बंदूक का जिक्र है, न मेरे पैसों का, और न ही मुझे मेरे पैसे वापस दिलाए गए।

नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने भी पीड़ित युवक से अस्पताल में जाकर मुलाकात की थी।

नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने भी पीड़ित युवक से अस्पताल में जाकर मुलाकात की थी।

एसपी बोले- तीन घंटे में आरोपी पकड़े गए थे इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाने वाले भीम आर्मी के देशराज धारिया बताते हैं, ‘मुझे शाम साढ़े पांच बजे गांव से फोन आया। मैंने तुरंत एसपी साहब को सूचना दी। जब हम गांव पहुंचे, तो आरोपी भाग रहे थे। हमने एक आरोपी को पकड़कर पुलिस को सौंपा, और बाद में पुलिस ने बाकी दो को भी गिरफ्तार कर लिया।’

वहीं भिंड के एसपी असित यादव का कहना है, ‘हमने तीनों आरोपियों को 3 घंटे के अंदर ही गिरफ्तार कर लिया था। जहां तक एफआईआर की बात है, हमने पूरी शिकायत दर्ज की है।

सवर्ण महापंचायत में जाटव समाज के बहिष्कार का ऐलान इस मामले में सवर्ण समाज एकजुट हो गया है। 23 अक्टूबर को सुरपुरा गांव में सवर्ण समाज की महापंचायत आयोजित की गई। जिसमें समाज के लोगों ने जाटव समाज का बहिष्कार करने की घोषणा की और शपथ लेकर सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक संबंध खत्म करने का फैसला लिया।

पंचायत में आए लोगों ने कहा कि वे अब जाटव समाज से किसी भी प्रकार का लेनदेन, खेती-बटाई या सामाजिक उठना-बैठना नहीं रखेंगे। महापंचायत में शपथ दिलाई गई कि सवर्ण समाज के लोग न तो उनके खेतों में काम करेंगे और न ही किसी तरह की आर्थिक मदद या व्यवहार रखेंगे। सभा में वक्ताओं ने कहा कि अब तक सवर्ण समाज, जाटव समाज की हर जरूरत में सहयोग करता आया है।

जरूरतमंदों को आर्थिक मदद दी जाती थी, गरीब परिवारों की बेटियों की शादियों में सहयोग दिया जाता था, और खेती-बाड़ी में भी सहारा प्रदान किया जाता था। लेकिन हाल ही में जिस तरह झूठे मामलों में सवर्ण समाज के लोगों को फंसाया जा रहा है, उससे अब दूरी बनाना ही उचित होगा।

सवर्ण समाज बोला- भीम आर्मी लगातार साजिश कर रही महापंचायत में ये भी बताया गया कि पीड़ित दलित युवक और आरोपी सोनू बरुआ के बीच पहले से पारिवारिक संबंध थे। पीड़ित, सोनू बरुआ के यहां ड्राइविंग का काम करता था और दोनों के बीच पैसों का लेन-देन भी था। करीब तीन से चार साल पहले 50 हजार रुपए का लेनदेन हुआ था, जिसे लेकर विवाद बढ़ा।

जिस तरह इस मामले को बंधक बनाने और पेशाब पिलाने जैसे अमानवीय रूप में पेश किया गया, वह पूरी तरह गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले के पीछे भीम आर्मी का षड्यंत्र है, जो समाज में जातीय खाई बढ़ाने का काम कर रही है। भीम आर्मी के लोग झूठे एससी-एसटी मामलों में सवर्ण समाज के लोगों को फंसाने का काम कर रहे हैं। इसके जरिए वो आर्थिक लाभ उठा रहे हैं।

अब जानिए कटनी का पूरा घटनाक्रम

पीड़ित बोला- सरपंच ने कहा, तू छोटी जाति का होकर सवाल पूछेगा पीड़ित ने बताया कि 13 अक्टूबर की शाम करीब 6 बजे मैं अपने खेत पर था। मैंने देखा कि रामगढ़ पहाड़ी पर जेसीबी से अवैध रूप से मिट्टी खोदी जा रही है। मैंने वहां मौजूद राम बिहारी हल्दकार से पूछा कि सरकारी जमीन पर यह क्यों हो रहा है? इतना सुनते ही वह मुझे जाति सूचक गालियां देने लगा और धमकाने लगा। मैं डरकर अपने खेत वापस आ गया।

जब मैं अपनी मां के साथ घर लौट रहा था, तो गांव के मुक्तिधाम के पास राम बिहारी ने अपना ट्रैक्टर रास्ते में खड़ा कर दिया था। उसके साथ सरपंच रामानुज पांडेय उनका बेटा पवन और भतीजा सतीश भी थे।

उन्होंने मुझे देखते ही जाति सूचक गालियां देनी शुरू कर दीं और कहने लगे तू छोटी जाति का होकर सवाल करेगा? तेरी इतनी हिम्मत हो गई। यह कहते हुए उन्होंने मुझ पर हमला कर दिया। मुझे जमीन पर गिराकर मेरा गला दबाने लगे।

पुलिस ने दो दिन बाद लिखी FIR पीड़ित के मुताबिक आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी थी। उनके डर से मैंने 112 पर फोन किया, लेकिन कोई नहीं आया। मैं किसी तरह कटनी के एजेके (अनुसूचित जाति कल्याण) थाना पहुंचा, लेकिन वहां भी मेरी शिकायत नहीं लिखी गई और कहा गया कि संबंधित थाने में जाओ।

मेरी हालत बहुत खराब थी, इसलिए मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। 15 अक्टूबर को मैंने कटनी एसपी को आवेदन दिया, तब जाकर 16 अक्टूबर को मेरी एफआईआर दर्ज हुई। आज घटना को 10 दिन से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।

पीड़ित ने कहा, ‘मुझे पुलिस सुरक्षा मिली है, लेकिन मैं कब तक घर में बंद रह सकता हूं? मुझे अपनी जान का खतरा है। पांडे परिवार गांव का मालगुजार परिवार है और वर्तमान में सरपंच भी उन्हीं के परिवार से है।

मैंने पिछले चुनाव में उनके खिलाफ चुनाव लड़ा था, शायद इसी वजह से वे मुझसे रंजिश रखते हैं। पीड़ित की मां ने बताया कि जब वे मेरे बेटे को मार रहे थे, तो मैं उसे बचाने दौड़ी। रामानुज पांडे ने मेरी चोटी पकड़कर मुझे घसीटा और दूर फेंक दिया। मैं हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाती रही, लेकिन वे नहीं माने।

सरपंच बोला- मुरम तहसीलदार के कहने पर निकाली थी सरपंच रामानुज पांडेय ने कहा- सभी आरोप झूठे हैं। मुझे फंसाने की साजिश है। साल 2022 में पंचायत चुनाव में वह प्रतिद्वंद्वी के रूप में खड़ा था। मुझे 103 और उसे 100 वोट मिले थे। तब से वह खुन्नस रखे हुए है। इसी का बदला ले रहा था। वह शुरुआत से काम में बाधा डाल रहा है। हमने इसकी शिकायत, एसपी, जिला सीईओ और जनपद सीईओ को लिखित और मौखिक दी है।

शिकायत में कहा है कि यह व्यक्ति काम नहीं करने दे रहा। मजदूरों से गाली-गलौज करता है। झूठे केस में फंसाने की धमकी देता है। पैसे भी मांगता है। हम आज तक कभी बोले नहीं हैं। फिलहाल पंचायत भवन का काम चल रहा है। तहसीलदार से अनुमति के बाद शासकीय जमीन से मुरम निकालने का काम कर रहे थे। दो ट्रैक्टर और जेसीबी लगे थे। टीआई को भी जानकारी दी थी। बाद में डायल 100 आई थी, जैसे ही पुलिसकर्मी पहुंचे, तो वह भाग गया।

बहोरीबंद विधायक प्रणय पांडे के साथ सरपंच रामानुज पांडेय

बहोरीबंद विधायक प्रणय पांडे के साथ सरपंच रामानुज पांडेय

एससी-एसटी उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ रही हैं- भीम आर्मी मध्य प्रदेश भीम आर्मी के सुनील अस्ते का कहना है कि प्रदेश भर में लगातार दलित आदिवासी और पिछड़ों के उत्पीड़न की घटनाएं सामने आ रही है। कटनी और भिंड की घटनाएं मानवता को शर्मसार करने वाली घटनाएं हैं। दोनों ही घटनाओं में पुलिस की भूमिका संदेहास्पद हैं।

हम प्रदेश के मुख्यमंत्री से मांग करते हैं कि इस तरीके की घटनाओं के लिए एक विशेष कानून बनाने की जरूरत है। जिससे दलित आदिवासियों और पिछड़ों को न्याय मिल पाए और ऐसी अमानवीय घटनाओं पर रोक लगे।



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