Agriculture Tips: खेती में लागत घटाकर मुनाफा बढ़ाने का सबसे आसान और कारगर तरीका जैविक खाद (Organic Manure) का उपयोग है. आज भी गांवों में गोबर की खाद को सबसे उत्तम माना जाता है. लेकिन, समस्या ये है कि पारंपरिक तरीके से गोबर सड़ने में तीन से चार महीने तक का समय लग जाता है. इस लंबे इंतजार के कारण कई किसान रासायनिक खादों की ओर मुड़ जाते हैं.
गोबर की खाद जल्दी तैयार करने की नई विधि
राकेश पटेल इस विधि में गोबर, गोमूत्र, मिट्टी, छाछ और गुड़ के घोल का उपयोग करते हैं. यह एक तरह की प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है जिसमें सूक्ष्म जीव तेजी से गोबर को सड़ा देते हैं.
विधि इस प्रकार है:
1. सबसे पहले किसी खुले लेकिन छायादार स्थान पर जमीन को समतल कर लें.
2. वहां 3 फीट चौड़ी और 1 फीट गहरी गड्ढी बनाएं.
3. उसमें एक परत गोबर की डालें और ऊपर से गोमूत्र का छिड़काव करें.
4. इसके बाद एक पतली परत मिट्टी की डालें और फिर से गोमूत्र और पानी का हल्का छिड़काव करें.
5. इसी प्रक्रिया को तब तक दोहराएं जब तक गड्ढा भर न जाए.
6. अब गुड़ और छाछ को पानी में मिलाकर उस पर डाल दें.
7. ऊपर से बोरी या पुआल से ढक दें और हर पांच दिन में गोबर को उलट-पलट दें.
नोट: ऐसा करने से लगभग 25 दिनों में तैयार हो जाएगी उत्तम जैविक खाद.
क्यों है यह खाद खास?
इस खाद में मिट्टी को पोषक तत्व देने वाले सूक्ष्म जीवों की संख्या लाखों में होती है. ये जीव नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटैशियम जैसे प्रमुख तत्वों को फसल के लिए उपलब्ध कराते हैं. इससे मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है, पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और फसलों में रोगों की संभावना घटती है. राकेश बताते हैं कि जब से उन्होंने इस 25-दिवसीय खाद का इस्तेमाल शुरू किया है, उनकी सोयाबीन और गेहूं की पैदावार में 20 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है.
लागत में भारी कमी
जहां रासायनिक खादों पर किसान को प्रति एकड़ 2 से 3 हजार रुपये का खर्च आता है, वहीं यह घरेलू खाद मात्र 200 से 300 रुपये में तैयार हो जाती है. इसमें इस्तेमाल होने वाली सभी चीजें गोबर, गोमूत्र, मिट्टी, गुड़ और छाछ गांव में आसानी से मिल जाती हैं. इसके उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता भी खराब नहीं होती, जबकि रासायनिक खाद लंबे समय में जमीन की उर्वरता घटा देती है.