यूट्यूब पर कार्बाइड गन बनाने के बड़ी संख्या में वीडियो सामने आए हैं।
कार्बाइड गन बनाने का तरीका क्या है? यूट्यूब पर यह सर्च करते ही स्क्रीन पर ढेरों वीडियो सामने आ जाएंगे। ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर धड़ल्ले से कार्बाइड गन बेची जा रही है। जबकि इसकी वजह से मध्यप्रदेश में लोगों की आंखें डैमेज होने के 300 केस सामने आ चुके हैं
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शुक्रवार रात को सीएम डॉ. मोहन यादव ने इससे घायल मरीजों से मुलाकात की है। उन्होंने कार्बाइड पाइप गन के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने भी कलेक्टरों से कार्रवाई करने को कहा है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत 4 जिलों में रोक भी लगाई गई है।
दैनिक भास्कर ने एक ई-कॉमर्स साइट से कार्बाइड पाइप गन बुक कर रियलिटी चेक किया। साइट पर ये गन बंदर भगाने यानी PVC Monkey Repeller Gun के नाम से बेची जा रही है।
ई-कॉमर्स प्लेटफार्म अमेजन, फ्लिप कार्ड, ई-बे पर इसकी कीमत ढाई हजार रुपए तक है। 5 से 7 दिन के भीतर डिलीवरी का दावा है। हालांकि, भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि ई-कॉमर्स कंपनी पर बिक्री बंद कराएंगे।
अमेजन पर दैनिक भास्कर ने गन बुक की।
भोपाल प्रशासन सख्ती करेगा इसे लेकर अब भोपाल प्रशासन सख्ती करने जा रहा है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि ई-कॉमर्स पर भी कार्बाइड गन बिक रही है। उन्हें बंद करवाने के लिए प्रयास शुरू किए हैं। वेंडर्स को लेटर लिख रहे हैं। दूसरी ओर, अस्पतालों में भर्ती मरीजों पर नजर रखी जा रही है।
यदि एयर एम्बुलेंस की जरूरत पड़ी तो वो भी उपलब्ध कराएंगे। वर्तमान में हमीदिया समेत कई अस्पतालों में मरीजों का इलाज किया जा रहा है। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल, कलेक्टर सिंह मरीजों से मुलाकात कर चुके हैं। वहीं, जिला प्रशासन ने गंभीर घायलों को रेडक्रास के माध्यम से 5-5 हजार रुपए की मदद भी की।

पिछली दिवाली पर मामले सामने नहीं आए कलेक्टर ने कहा कि पिछली दिवाली में ऐसे मामले सामने नहीं आए थे। इस बार ही मामले देखने को मिले हैं। लाइसेंसधारी ये नहीं बेच रहे, बल्कि फुटकर में बाजारों में बिकीं।
कार्बाइड पाइप गन की बिक्री को लेकर कलेक्टर सिंह ने कहा कि यदि आगे गन बिकते हुए जब्त की गई तो संबंधित के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के साथ विस्फोटक अधिनियम के तहत भी कार्रवाई करेंगे।
100 से 200 रुपए में बिकती है देसी गन यह कार्बाइड पाइप गन फुटकर बाजार में 100 से 200 रुपए में मिल रही है, जो अब ‘खतरनाक ट्रेंड’ बन चुकी है। इस संबंध में विशेषज्ञ डॉ. एसएस कुबरे ने बताया कि इसमें भरा कैल्शियम कार्बाइड (Calcium Carbide) पानी के संपर्क में आने पर एसिटिलीन गैस (Acetylene Gas) बनाता है। यह गैस विस्फोट के साथ जलती है और कुछ ही सेकेंड में आंखों, त्वचा और चेहरे को झुलसा देती है।

गूगल, यूट्यूब पर सर्च में हजारों वीडियो कलेक्टर के बयान के बाद दैनिक भास्कर ने भी गूगल और यूट्यूब पर ‘कार्बाइड गन बनाने का तरीका क्या है’? सर्च किया। यह लिखते ही एक के बाद एक हजारों वीडियो सामने आए। इसमें कार्बाइड बन बनाते, बेचते और उसे चलाते हुए वीडियो शामिल हैं।
इन्हीं पर भोपाल प्रशासन की नजर है। कलेक्टर का कहना है कि ई-प्लेटफार्म और यूट्यूब पर अपलोड वीडियो को बैन करने के लिए पुलिस के माध्यम से पत्र लिखेंगे। ताकि, आगे कोई खतरा न रहे। लोग भी जागरूक हो सके।

हमीदिया अस्पताल में भर्ती मरीजों को देखते डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल।
गन को लेकर ICMR दो साल पहले दे चुका था चेतावनी हादसों के बीच यह भी पता चला है कि इस कार्बाइड गन को सोशल मीडिया पर बंदर भगाने के देसी जुगाड़ के रूप में वायरल किया गया था। इस जुगाड़ सिस्टम को लेकर 2023 में ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) भोपाल ने चेतावनी दी थी।
संस्थान के वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में बताया था कि कैल्शियम कार्बाइड और पानी के केमिकल रिएक्शन से बनने वाली गैस ‘एसिटिलीन’ सिर्फ धमाका नहीं करती, बल्कि आंखों की रोशनी तक छीन लेती है। यह स्टडी इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थेलमोलॉजी में प्रकाशित भी हुई थी। इसके बाद भी समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए।
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भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में कार्बाइड पाइप गन बेचने, खरीदने और स्टॉक पर रोक लगा दी गई है।
भोपाल और ग्वालियर समेत कई जिलों में कार्बाइड गन के इस्तेमाल से करीब 300 लोगों की आंखें खराब होने के बाद अब पूरे एमपी में इसकी खरीदी-बिक्री पर रोक लगा दी गई है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने इसके निर्देश दिए है। पूरी खबर यहां पढ़ें…