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Agriculture News: डॉ आरके सिंह ने लोकल 18 से कहा कि गेहूं की फसल में नत्रजन का यह तीन चरणीय वितरण वैज्ञानिक रूप से सबसे ज्यादा प्रभावी तरीका है. इससे न सिर्फ पौधों का विकास समान रूप से होता है बल्कि उत्पादन में 15 से 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी भी देखने को मिलती है. किसानों को ध्यान देना चाहिए कि ज्यादा मात्रा में एक साथ खाद डालने से पौधा हरा-भरा तो दिखता है लेकिन बाद में दाने पतले और अधूरे रह जाते हैं.
खरगोन. मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में रबी सीजन की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. खेतों में गेहूं की बुआई 15 अक्टूबर से जारी है. इस बीच कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि गेहूं की फसल में कभी भी पूरी खाद एक साथ नहीं डालनी चाहिए. ऐसा करने से पौधों को पोषक तत्वों का सही लाभ नहीं मिलता और उत्पादन प्रभावित होता है. वहीं अगर गेहूं में खाद को सही समय और सही तरीके से डाला जाए, तो बालियां दानों से भर जाएंगी. साथ ही अधिकतम उत्पादन भी मिलेगा. खरगोन के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ आरके सिंह लोकल 18 को बताते हैं कि गेहूं की फसल में अगर नत्रजन के रूप में यूरिया डाल रहे हैं, तो कभी भी एक बार में पूरी मात्रा नहीं डालनी चाहिए. इसे तीन भागों में बांटकर अलग-अलग समय पर खेत में डालना चाहिए. फसल को हर अवस्था में पोषक तत्वों की जरूरत होती है. अगर नत्रजन को एक बार में डाल दिया जाए, तो उसका बड़ा हिस्सा मिट्टी में नष्ट हो जाता है या पानी के साथ बह जाता है.
फूल आने पर डालें बची मात्रा
डॉ सिंह बताते हैं कि गेहूं में 45 से 50 दिन बाद जब पौधे में गोफे या फूल निकलने (बालियां बनने) की अवस्था आती है, तब बची हुई एक चौथाई यूरिया डालनी चाहिए. इस समय पौधे को सबसे ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है. अगर किसान इस अवस्था में यूरिया डालते हैं, तो सारी बालियां एक साथ निकलती हैं, दाने समान आकार के बनते हैं और फसल का रंग सुनहरा और आकर्षक हो जाता है. इससे कटाई के समय उत्पादन में बढ़ोतरी होती है.
20 फीसदी तक ज्यादा लाभ
डॉ सिंह का कहना है कि गेहूं की फसल में नत्रजन का यह तीन चरणीय वितरण वैज्ञानिक रूप से सबसे प्रभावी तरीका है. इससे न केवल पौधों का विकास समान रूप से होता है बल्कि उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी भी देखी गई है. उन्होंने कहा कि किसान भाइयों को ध्यान रखना चाहिए कि ज्यादा मात्रा में एक साथ खाद डालने से पौधा तो हरा-भरा दिखता है लेकिन बाद में दाने पतले और अधूरे रह जाते हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.