मंडला जिला जेल में बंद विचाराधीन कैदी अजीत पटेल की सोमवार को जिला अस्पताल में मौत हो गई। तबीयत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजन ने अजीत की मौत पर सवाल उठाते हुए हत्या का आरोप लगाया है और न्यायिक जांच की मांग की है।
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अजीत 17 जून 2024 से पॉक्सो एक्ट के एक मामले में जेल में बंद था। मृतक के पिता जगदीश पटेल ने कलेक्टर को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि उन्हें बेटे के अस्वस्थ होने की कोई जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने हत्या की आशंका जताते हुए मामले की न्यायिक जांच की मांग की है।
मृतक के वकील बोले- पत्र लिखकर बिगड़ती हालत की जानकारी दी थी
अजीत के वकील मृत्युंजय पाठक ने बताया कि उन्होंने पिछले सप्ताह जेलर और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अजीत के पीलिया बढ़ने और बिगड़ती हालत की जानकारी दी थी। उन्होंने जबलपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज का अनुरोध किया था, लेकिन समय पर उचित उपचार नहीं मिल सका।
वकील के अनुसार, 25 अक्टूबर को जमानत आवेदन प्रस्तुत किया गया था, जिसकी सुनवाई सोमवार को होनी थी, लेकिन उससे पहले ही अजीत की मौत हो गई।
मेरे भाई को मारकर यहां लाया गया
अजीत की बहन अंजली पटेल ने आरोप लगाया कि उन्हें भाई की बीमारी की सूचना नहीं दी गई। उन्होंने कहा, “मेरे भाई को मारकर यहां लाया गया है। उसकी मौत में पूरा जेल प्रशासन शामिल है। हम निष्पक्ष न्याय चाहते हैं।”
जेल अधिकारी ने आरोपों को खारिज किया
सहायक जेल अधीक्षक वासुदेव मांझी ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने बताया कि अजीत की तबीयत खराब होने पर 18 अक्टूबर को उसे अस्पताल भेजा गया था, जहां रिपोर्ट सामान्य आई थी और उसका उपचार जारी था।
सोमवार सुबह दोबारा हालत बिगड़ने पर उसे सुबह करीब 11:30 बजे अस्पताल भेजा गया, जहां शाम लगभग 4 बजे उसकी मृत्यु की सूचना मिली।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने मामले की जांच प्रारंभ कर दी है। परिजन न्याय और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
