इंदौर पुलिस कमिश्नर ने टीआई अजय वर्मा और एसआई धीरज को सजा के तौर पर एसआई और आरक्षक बनने की सजा दी है। वहीं हेड कॉन्टेबल को इस मामले में बर्खास्त किया गया। वह पहले ही अन्य मामले में लाइन अटैच था।
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इसकी जब जानकारी सामने आई तो ASI ने यह कहते हुए मामला हेड काॅन्स्टेबल पर डाल दिया कि रेप मामले में आरोपी रवि को सिपाही ही थाने लेकर आया था। जबकि मार्च माह से पीड़िता को एएसआई FIR के लिए टालते हुए आ रहा था।
टीआई अजय वर्मा भले ही सितंबर 2022 के मामले में सजा पाकर SI बन चुके हो और ASI धीरज आरक्षक, लेकिन इस मामले में सबसे पहले सजा पाने वाले हेड काॅन्स्टेबल गोविंद द्विवेदी बर्खास्त होने के बाद बतौर सारे सबूत हाईकोर्ट में पेश कर निर्दोष होकर ढाई माह से पुलिस विभाग में नौकरी कर रहे हैं।
पुलिस थाना एमआईजी के अंदर का दृश्य।
उनके मुताबिक वह सही थे तो हाईकोर्ट में अपने ही अफसरों से लड़े और सच का साथ दिया। इसके बाद फिर से नौकरी पर आ गए। जब हाईकोर्ट ने गोविंद को लेकर अफसरों से सबूत मांगे तो उन्होंने यह कहते हुए मामले से किनारा किया कि मीडिया में खबरें आने के बाद विभाग की छवि धूमिल हो रही थी इसलिए उन्हें हेड काॅन्स्टेबल को हटाना पड़ा।
मार्च 2022 में पीड़िता ने दिया था आवेदन पूरे मामले में सबसे बड़़ी चूक एएसआई धीरेंद्र से हुई। मार्च 2022 में पीड़िता ने सबसे पहले शिकायती आवेदन उसे सौंपा था। मामला टीआई अजय वर्मा तक पहुंचा और इसके बाद धीरेंद्र पीड़िता को टालमटोल करते रहा। वह रवि से लगातार संपर्क में था।
इसके बाद 13 सिंतबर को FIR की गई। 15 सिंतबर को टीआई, एएसआई और हेड काॅन्स्टेबल गोविद पर जांच की शुरुआत हुई। जबकि 26 अगस्त को ही गोविंद खुफिया सेल में मासिक जानकारी नहीं देने के चलते लाइन अटैच कर दिया गया था। इसके बाद 18 अक्टूबर को प्राथमिक जांच के बाद उसे बर्खास्त कर दिया था।
बयानों में नहीं दी जानकारी

पुलिस थाना एमआईजी इंदौर।
हेड काॅन्स्टेबल गोविंद द्विवेदी का रेप पीड़िता ने अपने बयान में कही रुपए के लेन-देन को लेकर नाम नहीं लिया। इस मामले में आरोपी रवि ने भी बयान में रुपए को लेकर गोविंद पर सीधे आरोप नहीं लगाए। पीड़िता ने अपने मामा का नाम लिया, जो रवि से समझौते के रुपए लेकर गया था।
जब पुलिस ने उसके बयान लिए तो उसने खुद को पुलिस का मुखबिर बताया। उसने कहा कि उसके करीब शहरभर में कई वरिष्ठ अफसरों और 150 से ज्यादा पुलिसकर्मियों से संबंध हैं। हाईकोर्ट में गोविंद के लिए वरिष्ठ अफसर यहां भी सबूत पेश नहीं कर पाए। जिसमें यह साबित नहीं हो पाया कि रुपए गोविंद या किसी पुलिसकर्मी ने हाथ में लिए थे।
उज्जैन में भी कपड़ा व्यापारी के खिलाफ दिया आवेदन जिस युवती ने रवि पर इंदौर के एमआईजी थाने में मार्च माह में रेप होने को लेकर आवेदन दिया था। उसने मार्च से लेकर सितंबर तक FIR होने के बीच में उज्जैन के एक कपड़ा व्यापारी संजय पर नीलगंगा थाने में भी रेप को लेकर आवेदन दे दिया।
जिसमें पीड़िता उस पक्ष को भी ब्लैकमेल कर 50 लाख की डिमांड करने लगी। इस मामले में पीड़ित पक्ष ने इंदौर से पीड़िता की जानकारी निकाली। एमआईजी मामले की जानकारी हाथ लग गई। पीड़िता और उसके साथियों को लेकर इस मामले में वरिष्ठ अफसरों को जानकारी दी गई।
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चर्चित हनी ट्रेप केस में फंसे तत्कालीन टीआई अजय वर्मा को डिमोट कर दो साल के लिए इंस्पेक्टर और एएसआई धीरज शर्मा को पांच साल के लिए सिपाही बना दिया गया। इसे लेकर टीआई वर्मा पुराने मामलों को लेकर भी चर्चाओं में है। इंदौर में दो साल पहले वे लोकायुक्त की जांच के घेरे में थे जबकि उज्जैन के महाकाल मंदिर के पास दीवार गिरने से दो लोगों की मौत के मामले में भी उन्हें सस्पेंड किया जा चुका है। पूरी खबर यहां पढ़ें…