ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सोमवार को मुरैना के एक कंप्यूटर संस्थान के संचालक की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। आरोप है कि संस्थान के संचालक ने डीसीए की तैयारी कर रही छात्रा से दुष्कर्म कर अश्लील वीडियो बनाए थे।
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जमानत याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता ने कहा कि यह गंभीर और घृणित अपराध है। लड़की की अश्लील वीडियो बनाना और उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाना समाज व महिला की अस्मिता के खिलाफ है। इस प्रकार का अपराध निंदनीय है और समाज में अस्वीकार्य है। मैं इस स्थिति में आरोपी को जमानत देने के पक्ष में नहीं हूं।
ऐसे समझिए पूरा मामला पीड़ित छात्रा के पिता ने मुरैना स्थित सिटी कोतवाली थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी बेटी DCA (डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशन) कोर्स कर रही थी। वह मुरैना के एक कंप्यूटर इंस्टीट्यूट में पढ़ाई करती थी। इसी संस्थान का संचालक इंसानियत उर्फ असलम छात्रा के साथ अभद्र व्यवहार करता था। आरोप है कि उसने छात्रा को बहला-फुसलाकर संस्थान में बलात्कार किया और घटना का अश्लील वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी दी। बाद में पीड़िता ने अपने पिता को फोन पर पूरी घटना बताई, जिसके बाद मामला दर्ज हुआ।
पुलिस ने अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज किया। आरोपी कंप्यूटर इंस्टीट्यूट के संचालक की एक जमानत याचिका जिला कोर्ट से पहले ही खारिज हो चुकी है। जिसके बाद आरोपी ने दूसरी बार हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की। उसकी ओर से तर्क दिया कि आरोपी निर्दोष है, उसे झूठा फंसाया गया है, जांच पूरी हो चुकी है, इसलिए उसे जमानत दी जाए। शासकीय वकील ने किया जमानत का विरोध इस मामले में सोमवार को आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई थी। जिस पर आरोपी के वकील ने आरोपों को झूठा बताकर जमानत देने की गुजारिश की थी, लेकिन शासकीय अधिवक्ता अभिषेक भदौरिया ने आरोपी को जमानत देने का विरोध करते हुए कहा है कि आरोपी ने कई बार यौन शोषण किया और कमरे में कैमरा लगाकर वीडियो बनाए, जो गंभीर अपराध है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी है।