कसेरा समाज ने मनाई सहस्त्रार्जुन महाराज की जयंती: शोभायात्रा निकाली, हवन-पूजन और भंडारे का आयाजन; कुरीतियों को दूर करने का संकल्प लिया – Harda News

कसेरा समाज ने मनाई सहस्त्रार्जुन महाराज की जयंती:  शोभायात्रा निकाली, हवन-पूजन और भंडारे का आयाजन; कुरीतियों को दूर करने का संकल्प लिया – Harda News


हरदा में मंगलवार को हैहय वंशीय ताम्रकार समाज ने राजराजेश्वर सहस्रार्जुन महाराज जयंती बड़े उत्साह और धार्मिक उल्लास के साथ मनाई। सुबह से ही समाज की महिलाओं ने अपने-अपने घरों के मुख्य द्वारों पर आकर्षक रंगोलियां सजाईं। कई महिलाओं ने थीम आधारित रंगोली ब

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समाज की एक बेटी ने रंगोली के माध्यम से बेटियों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया। महिलाओं के इन प्रयासों ने आयोजन में विशेष आकर्षण पैदा किया।

कसेरा मोहल्ले से निकली भव्य शोभायात्रा शहर में जयंती अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो कसेरा मोहल्ले से प्रारंभ होकर जैसानी चौक, गणेश चौक, घंटाघर होते हुए गुप्तेश्वर मंदिर तक पहुंची। यात्रा में समाज के सैकड़ों लोग शामिल हुए। गुप्तेश्वर मंदिर परिसर स्थित भगवान सहस्रबाहु अर्जुन मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई और प्रसाद वितरण किया गया।

सामाजिक एकता और कुरीतियों को दूर करने का लिया संकल्प महिला मंडल की सचिव वंदना चंद्रवंशी ने बताया कि समाज के सभी लोगों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर जयंती महोत्सव में भाग लिया। इस दौरान समाज ने सामाजिक एकता बनाए रखने और कुरीतियों को दूर करने का संकल्प भी लिया। तीन दिवसीय आयोजन में समाज की प्रतिभाओं को मंच प्रदान कर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

‘सहस्रबाहु अर्जुन क्षत्रिय धर्म की रक्षा के प्रतीक’ समाज अध्यक्ष मनोज चंद्रवंशी ने बताया कि सहस्रार्जुन महाराज हैहयवंशी राजा थे और उन्हें भगवान विष्णु का 24वां अवतार माना जाता है। उन्होंने बताया कि भगवान ने कठोर तपस्या से 10 वरदान प्राप्त किए और चक्रवर्ती सम्राट बने। वे भगवान दत्तात्रेय के परम भक्त थे, जिनकी उपासना से उन्हें सहस्र भुजाओं का वरदान मिला। इसी कारण उन्हें सहस्रबाहु अर्जुन कहा जाता है।

धर्म रक्षा और समाज उत्थान का प्रतीक पर्व मनोज चंद्रवंशी ने कहा कि सहस्रार्जुन जयंती क्षत्रिय धर्म की रक्षा और सामाजिक उत्थान के प्रतीक रूप में मनाई जाती है। पूजन-अभिषेक के बाद महा आरती और बुजुर्गों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में एकता, जागरूकता और सामाजिक सुधार को बढ़ावा देना रहा।

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