छठ पूजा से झूम उठा उज्जैन, शिप्रा किनारे हजारों व्रतियों ने दिया उगते सूर्य को अर्घ्य, सुख-समृद्धि की दुआ मांगी

छठ पूजा से झूम उठा उज्जैन, शिप्रा किनारे हजारों व्रतियों ने दिया उगते सूर्य को अर्घ्य, सुख-समृद्धि की दुआ मांगी


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धार्मिक नगरी उज्जैन में इस साल भी छठ पूजा की धूम रही. शिप्रा नदी के रामघाट पर हजारों महिलाएं डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने पहुंचीं. बिहार, यूपी और झारखंड की परंपराओं से सजे इस पर्व में व्रतियों ने परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी आयु की कामना की.

Ujjain News:  धार्मिक नगरी उज्जैन में हर पर्व बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. यहां मोक्ष दायनी मां शिप्रा का वास है. हर साल की तरह इस साल भी छठ पूजा का पर्व यहां हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया. काफी संख्या में महिलाएं रामघाट पर पहुंची और डूबते-उगते सूर्य को अर्घ्य देकर सुख-समृद्धि की कामना की.

25 अक्टूबर को नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ छठ पूजन का व्रत मंगलवार को सुबह समापन हो गया. चार दिन तक पूर्वांचल की संस्कृति में बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड सहित अन्य राज्यों की महिलाएं शिप्रा नदी के रामघाट पहुंचीं. यहां सोमवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया और संतान की दीर्घायु, सौभाग्य और खुशहाल जीवन के लिए एकत्र होकर भगवान से प्रार्थना की. वहीं मंगलवार सुबह उगते सूर्य को भी अर्घ्य देकर सुख की कामना की गई है. शहर में करीब हजारों लोग इस पर्व में सहभागिता करते नजर आए.

अंतिम दिन दिया उगते सूर्य को अर्घ्य दिया
हर साल की तरह इस साल भी छठ पूजा के दौरान व्रती श्रद्धालुओं का ताता देखने को मिला. बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने साथ सूप में फलों को लेकर आए और विधि-विधान के साथ करीब एक घंटे तक पूजा अर्चना की गई. छठ पर्व के चौथे और आखिर दिन सुबह उगते सूर्य को व्रतियों ने घाट किनारे उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर महाव्रत का समापन किया.

कठिन व्रतों में से एक छठ व्रत
इस पर्व में भगवान सूर्य व छठी माता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है. छठ व्रत को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना गया है. मान्यता है कि छठ व्रत करने से संतान की प्राप्ति, संतान की कुशलता, सुख-समृद्धि और लंबी आयु प्राप्त होती है. यहां पर अधिकतर बिहार के लोगों द्वारा पर्व मनाया जाता है, जिसमें सुहागन महिलाएं अपने परिवार की सुख समृद्धि की कामना के लिए उपवास रखकर छठी माता की पूजा करती हैं.

प्रकृति की पूजाकर मिलता है आर्शीवाद 
श्रद्धालु अर्पिता ने बताया कि छठ पूजा प्रकृति की पूजा के रूप में की जाती है. प्रसाद के रूप में फल और ठेकुआ चढ़ाया जाता है. यह पूजा परिवार और बच्चों के कल्याण के लिए की जाती है. मान्यता है कि छठ पूजा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. छठी मैया संतानों की रक्षा करती हैं और उन्हें दीर्घायु प्रदान करती हैं. यह पर्व पारिवारिक सुख-समृद्धि और मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए मनाया जाता है.

Dallu Slathia

Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें

Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across … और पढ़ें

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