Last Updated:
MS Dhoni Being Mr. Cool Since School Days: धोनी को यूं ही कैप्टन कूल की पदवी से नहीं नवाजा गया था, वे हर परिस्थिति में शांत, फोकस्ड रहते हैं. मीडिया से दूरी, कम बातचीत ये सब उनके अंदर क्रिकेट में फेमस होने के बाद नहीं आया. उनके पहले कोच बताते हैं कि धोनी हमेशा से ऐसे ही थे. शांत स्वभाव, गंभीर और अटल.
धोनी के सबसे पहले कोच चंचल भट्टाचार्य बताते हैं कि धोनी शुरू से ही ऐसे रहे हैं. हमेशा कम बोलना अपने काम से मतलब रखना लेकिन सबको साथ लेकर चलना. दरअसल, वह एकांत में और शांत इसलिए रहते हैं ताकि उनको मेंटल क्लेरिटी मिलती रहे.

वह प्रेजेंट में रहें और किसी चीज में बेवजह न उलझें और अपने गेम पर फोकस करें. यह बहुत बड़ी वजह है कि वे काफी कम बोलते हैं. बहुत अधिक एक्साइटेड भी नहीं होते और ना कभी बहुत ज्यादा दुखी होते हुए उन्हें देखा गया है.

उनका यह एटीट्यूड स्कूल के दिनों से ही है, मतलब बचपन से ही वे ऐसे ही हैं, कूल. जब कोई टीममेट नाराज हो जाता था तो तुरंत उसको मनाकर टीम में शामिल कर लेते थे. किसी को छोड़ते नहीं थे, धोनी का इस तरह का नेचर है.

कई बार कुछ लोग उनको गलत समझ लेते हैं, लोगों को लगता है कम बोलते हैं और ज्यादा लोगों से नहीं मिलते तो यह एटीट्यूड है. लेकिन ऐसा नहीं हैं, वे हमेशा से ही ऐसे हैं. उनको बहुत अधिक भीड़, मीडिया या फोकस में रहना, बहुत अधिक बोलना ये सब पसंद ही नहीं है.

उनका मानना है शांत रहना, अकेले रहना, दिमाग को रिलैक्स रखना और जो भी काम करो, उसे पूरे ध्यान और फोकस के साथ करना चाहिए. इसलिए एकांत और शांत रहना बहुत जरूरी होता है, तभी आपको सारी चीजें एकदम साफ दिखाई देती हैं.

जब मैं कोच था, तब भी वह मुझसे उतना ही बात करते थे, जितना जरूरी होता था. बेवजह की बातें करना या फिर बेवजह की बातें बनाना, बहुत ज्यादा हंसी-मजाक करना – शुरू से ही वह ऐसे नहीं थे. अपने काम को लेकर इतने समर्पित थे कि अगर मैं कुछ बोल देता कि आपको दूसरे जिले में जाकर यह काम करना है तो वो पूरा होता था.

वह ये भी नहीं देखते थे कि उनकी जेब में जाने के लिए पैसा है या नहीं, तुरंत जो काम बोला है वह जाकर, करके मुझे फौरन रिपोर्ट करते थे. उनको अपनी जिम्मेदारी का शुरू से एहसास रहा है और यही कारण है कि आज वह इस लेवल पर हैं की पूरी दुनिया उनको जानती है.