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SIR Public Opinion: वोटर लिस्ट को पारदर्शी बनाने के लिए 21 साल बाद इस तरह से समीक्षा की जा रही है, SIR यानी Special Intensive Revision (विशेष पुनरीक्षण) की प्रक्रिया के लिए 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक बीएलओ घर-घर जाएंगे. इसको लेकर जनता क्या कहती है, आइए जानते हैं.
अनुज गौतम, सागर: मध्य प्रदेश के 5 करोड़ 74 लाख मतदाताओं की समीक्षा करने के लिए चुनाव आयोग 4 नवंबर से घर-घर पहुंचेगा. क्योंकि निर्वाचन आयोग ने मध्य प्रदेश सहित 12 राज्यों में 28 अक्टूबर से SIR शुरू किया है. वोटर लिस्ट को पारदर्शी बनाने के लिए 21 साल बाद इस तरह से समीक्षा की जा रही है. SIR यानी Special Intensive Revision (विशेष पुनरीक्षण) की प्रक्रिया के लिए 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक बीएलओ घर-घर जाएंगे. 9 दिसंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होगी. फाइनल लिस्ट 7 फरवरी को जारी होगी. SIR में पलायन कर चुके और नए आए मतदाता की जांच की जाएगी जो बरसों पहले मृत हो चुके हैं. लेकिन आज भी उनका नाम मतदाता सूची में है उनके नाम हटाए जाएंगे, जिनके नाम दो जगह पर जुड़े हुए हैं उनको विधिवत किया जाएगा. लेकिन निर्वाचन आयोग के द्वारा की जा रही इस प्रक्रिया को लेकर आम जनता क्या सोचती है इसको लेकर लोकल 18 ने जनता से उनकी राय ली.
जितेंद्र सिंह राजपूत कहते हैं कि निर्वाचन आयोग की यह सराहनीय पहल है क्योंकि किसी व्यक्ति के दो जगह नाम जुड़े हैं कोई पलायन कर गया है इसकी वजह से फर्जी मतदाताओ के नाम अलग किए जाएंगे, इससे आने वाली भविष्य के चुनाव में भी पारदर्शिता रहेगी.
पवन नन्होरिया कहते हैं कि जो मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण हो रहा है यह आखरी बार 2004 में हुआ था 21 साल बाद अब ऐसा होगा जबकि हर साल लाखों आदमी मर जाते हैं लाखों जीवित हो जाते हैं हजारों लोग पलायन कर जाते हैं हजारों लोग नगर में प्रवेश कर जाते हैं, इसलिए मैं तो चाहूंगा कि यह हर साल होना चाहिए चुनाव भले ही 3 साल 5 साल में हो क्योंकि जो लोग अनुचित लाभ ले लेते हैं उन पर भी लगाम लगेगी.
ब्रह्मांदत्त पांडे कहते हैं कि विदेश के लोग सीमावर्ती राज्यों में तो दाखिल हो ही चुके हैं लेकिन जो भारत के बीच में राज्य मध्य प्रदेश है यहां पर भी बड़ी तादाद में आ गए हैं. कुछ समय से हमारे यहां एक महिला भीख मांगने के लिए आई थी जब हमने उस आधार कार्ड मांगा तो ना उसने आधार कार्ड दिखाए और अब जैसे ही हम देखते हैं तो वह वहां से भाग जाती है. इससे कुछ ना कुछ गड़बड़ है ऐसे लोगों के बारे में पता चलेगा.
श्रीकांत खत्री कहते हैं कि यह निर्वाचन आयोग की अच्छी पहल है क्योंकि कई लोग मृत हो चुके और उनकी अभी तक नाम नहीं कट पाई. कई लोग नाम जुड़वाना चाहते हैं लेकिन नाम ऐड होने में दिक्कत होती है तो इस तरह की जो परेशानियां हैं उन सभी का सरलीकरण किया जा रहा है नई व्यवस्था होगी तो थोड़ी दिक्कत होगी लेकिन धीरे-धीरे लोग समझेंगे तो समझ जाएंगे.
Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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