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खेती अब परंपरा नहीं, बल्कि कारोबार बन चुकी है. छोटे किसान भी नई तकनीक और वैज्ञानिक फसलों के जरिए लाखों की कमाई कर रहे हैं. ठंड के मौसम में लाल भिंडी (Red Okra) ऐसी ही फसल है, जो सेहत के साथ आमदनी का नया रास्ता खोल रही है.
ठंड का मौसम किसानों के लिए नई फसलों की शुरुआत का समय होता है. इसी सीजन में अब लाल भिंडी की खेती ने जोर पकड़ लिया है. यह भिंडी अपने गहरे लाल रंग और औषधीय गुणों के कारण खास पहचान बना रही है. लाल भिंडी न केवल बाजार में महंगी बिक रही है, बल्कि किसानों के लिए मुनाफे का नया जरिया बन चुकी है.

लाल भिंडी (Red Okra) मूल रूप से यूरोपीय देशों की फसल है, लेकिन अब यह भारत की मिट्टी में भी खूब फल-फूल रही है. भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी के वैज्ञानिकों ने इसकी देशी किस्म ‘काशी लालिमा’ (Kashi Lalima) तैयार की है. करीब 8 से 10 साल की मेहनत के बाद विकसित की गई यह किस्म भारतीय जलवायु के अनुकूल साबित हो रही है.

संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार, लाल भिंडी पोषक तत्वों का भंडार है. इसमें फॉलिक एसिड, कैल्शियम, आयरन, और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. यह बच्चों के मानसिक विकास में सहायक है और हार्ट डिजीज, मोटापा व डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद करती है.

लाल भिंडी को दवा के रूप में भी देखा जा रहा है. इसमें मौजूद एंथोसाइनिन तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. यही कारण है कि इसे “नेचुरल मेडिसिन” कहा जाने लगा है. नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण और हृदय रोगों से बचाव में भी लाभ मिलता है.

इसकी खासियत सिर्फ सेहत तक सीमित नहीं है. लाल भिंडी सामान्य हरी भिंडी से कई गुना महंगी बिकती है. काशी लालिमा की बाजार में कीमत 200 से 500 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है, जबकि हरी भिंडी सिर्फ 50 रुपये किलो में बिकती है. यही वजह है कि किसान अब बड़ी संख्या में इसकी ओर रुख कर रहे हैं.

लाल भिंडी की खेती साल में दो बार की जा सकती है. पहली फसल जनवरी-फरवरी से मार्च के बीच और दूसरी जून से जुलाई में ली जाती है. बुआई के 45 से 60 दिन बाद फसल तैयार हो जाती है. पौधों के बीच 25-30 सेमी और लाइनों के बीच 45-60 सेमी की दूरी रखनी चाहिए, ताकि पौधों को पर्याप्त हवा और धूप मिल सके.

किसानों को सलाह दी जाती है कि बुआई से पहले गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग करें. इससे फसल की क्वालिटी बेहतर होती है और उत्पादन क्षमता बढ़ती है.

संस्था से जुड़े कई किसानों ने अपने खेत में लाल भिंडी की जैविक खेती की है. किसानों के मुताबिक, ठंड में पौधों की बढ़त शानदार है और वर्तमान में इसका भाव 400 रुपये किलो तक है. उनकी माने तो एक एकड़ से 30 से 40 क्विंटल तक पैदावार आसानी से मिल रही है.