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Sidhi News: एमपी के सीधी जिले में मजदूरों के हक पर डाका डाल रहा है. ग्रामीण इलाकों में पंचायत ग्रामीण विकास विभाग योजना के तहत श्रमिकों को दिए जा रहे रोजगार में मजदूरी भुगतान कुछ अधिकारी मनमानी तरीके से कर रहे हैं, आइए जान लेते हैं क्या है पूरा मामला.
Sidhi News: मध्य प्रदेश के सीधी जिले से मजदूरों की बदहाली का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां मजदूरों को एक दिन की मेहनत के बदले मात्र ₹14 रुपये 17 पैसे की मजदूरी दी गई है. सबसे हैरान करने वाली यह कहानी जिले के कुसमी जनपद क्षेत्र के बस्तुआ ग्राम पंचायत की है, जहां खेत तालाब निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों को छह दिनों की मेहनत का कुल ₹85.20 रुपये भुगतान किया गया है. यह भुगतान मजदूरों के बैंक खातों में किया गया है, जिससे पूरे प्रकरण की सच्चाई खुद सरकारी अभिलेखों से उजागर हुई है. ग्राम पंचायत से जारी मास्टर रोल के अनुसार, खेत तालाब निर्माण कार्य छह दिनों तक चला और इस दौरान मजदूरों को जो भुगतान किया गया, वह सरकारी न्यूनतम मजदूरी मानकों के विपरीत है. मास्टर रोल की प्रति सामने आने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है.
मजदूरों के मुताबिक, उन्होंने सुबह से शाम तक खेत तालाब निर्माण में कड़ी मेहनत की, लेकिन उन्हें मजदूरी का नाम पर अपमानजनक रकम दी गई. इस मामले ने प्रशासनिक तंत्र की गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है, जब इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों से पूछा गया तो उन्होंने जांच की बात कही, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि ऐसी घटनाएं अक्सर होती हैं और जांच के नाम पर सबकुछ ठंडे बस्ते में चला जाता है.
मजदूरी भुगतान में बड़ी लापरवाही
गौरतलब है कि मनरेगा और अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं के तहत मजदूरों की न्यूनतम दैनिक मजदूरी लगभग ₹204 से ₹221 तय है, जबकि सामान्य तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में दिहाड़ी मजदूरी ₹200 से ₹500 तक दी जाती है, ऐसे में ₹14.17 की मजदूरी सरकारी प्रणाली की संवेदनहीनता और पारदर्शिता पर सवाल उठाती है. सीधी जिले के ग्रामीण इलाकों में रोजगार के साधनों की भारी कमी हैग्राम पंचायत स्तर पर सीमित काम मिलने और समय पर भुगतान न होने के कारण हजारों से अधिक मजदूर पलायन को मजबूर हैं. बस्तुआ सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली जैसे राज्यों में काम की तलाश में जाते हैं.
बहरहाल, इस पूरे मामले में RES विभाग के इंजीनियर और एसडीओ के द्वारा मजदूरी भुगतान में बड़ी लापरवाही की गई है. अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है. क्या जिम्मेदार दोषी अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी अन्य भ्रष्टाचार की घटनाओं की तरह फाइलों में दफन हो जाएगा? फिलहाल, ₹14.17 की मजदूरी का यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े कर रहा है.
Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें
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