जर्सी नंबर-5: कभी गंभीर ने बनाया था वर्ल्ड चैंपियन, अब जेमिमा ने वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचाकर पूरा किया भारत का सपना

जर्सी नंबर-5: कभी गंभीर ने बनाया था वर्ल्ड चैंपियन, अब जेमिमा ने वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचाकर पूरा किया भारत का सपना


भारत की धाकड़ बल्लेबाज जेमिमा रोड्रिग्स ने कंगारुओं के जबड़े से जीत छीनते हुए टीम इंडिया को तीसरी बार महिला वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचा दिया है. ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 338 रन बनाए थे. भारतीय टीम ने जेमिमा रोड्रिग्स के नाबाद 127 रन और कप्तान हरमनप्रीत कौर के 89 रन की पारी की बदौलत 48.3 ओवर में 5 विकेट पर 341 रन बनाकर मैच 5 विकेट से जीता. जेमिमा रोड्रिग्स ने मुंबई में 2011 वर्ल्ड कप फाइनल में गौतम गंभीर की 97 रनों की पारी की याद दिलाते हुए, भारत के करोड़ों फैंस की यादें ताजा कर दीं.

जेमिमा ने दिलाई गौतम गंभीर की याद

श्रीलंका के खिलाफ 2011 वर्ल्ड कप के फाइनल मैच में गौतम गंभीर ने नंबर-3 पर बल्लेबाजी करते हुए 97 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली थी. भारत ने यह फाइनल मैच 6 विकेट से जीतकर 28 साल बाद वनडे वर्ल्ड कप की ट्रॉफी पर कब्जा किया था. गौतम गंभीर जब टीम इंडिया के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेलते थे तो जर्सी नंबर-5 पहनते थे. जर्सी नंबर-5 पहनकर खेलने वाली महिला क्रिकेटर जेमिमा रोड्रिग्स ने अब 14 साल बाद गौतम गंभीर की उसी याद को ताजा कर दिया है.

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जेमिमा ने वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचाकर पूरा किया भारत का सपना

टीम इंडिया के सामने जब 339 रन का विशाल टारगेट था, तब जेमिमा रोड्रिग्स ने नंबर-3 पर बल्लेबाजी करते हुए 134 गेंदों पर 127 रनों की जबरदस्त पारी खेली. जेमिमा रोड्रिग्स ने क्रीज पर पैर जमाकर एक छोर संभाले रखा और भारत को महिला वर्ल्ड कप 2025 के फाइनल में पहुंचाकर ही दम लिया. जेमिमा रोड्रिग्स के धैर्य, संयम और आक्रामकता ने गौतम गंभीर की याद दिला दी. जेमिमा रोड्रिग्स का विकेट गिर जाता तो भारत यह मैच हार भी सकता था. जेमिमा रोड्रिग्स हालांकि खड़ी रहीं और भारत का सपना पूरा किया.

जेमिमा रोड्रिग्स ने यादगार कहानी लिखी

जेमिमा रोड्रिग्स ने अपनी शतकीय पारी से भारत के फाइनल में पहुंचने की यादगार कहानी लिखी. जेमिमा रोड्रिग्स को उनकी नाबाद 127 रनों की पारी के लिए ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया. मैच के बाद जेमिमा रोड्रिग्स ने कहा, ‘सबसे पहले, मैं यीशु का शुक्रिया अदा करना चाहती हूं, क्योंकि मैं यह सब अकेले नहीं कर सकती थी. मुझे पता है कि उन्होंने आज मुझे इस मुश्किल दौर से निकाला. मैं अपनी मां, पिताजी, कोच और हर उस व्यक्ति का शुक्रिया अदा करना चाहती हूं, जिन्होंने इस दौरान मुझ पर विश्वास किया. पिछले चार महीने वाकई बहुत मुश्किल रहे, लेकिन यह एक सपने जैसा लग रहा है और अभी तक पूरी तरह से साकार नहीं हुआ है.’





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